Bihar Shiv Corridor:बिहार को मिलेगा अपना कॉरिडोर , काशी की तर्ज पर सजेगा सुल्तानगंज, शिव भक्तों के लिए तैयार हो रहा भव्य मार्ग, आस्था की राह से हटी रुकावट

Bihar Shiv Corridor:बिहार के पहले शिव कॉरिडोर को लेकर लंबे अरसे से चला आ रहा इंतज़ार अब खत्म होने की कगार पर है। ...

Bihar to Get Its Own Kashi Vishwanath Corridor for Devotees
बिहार को मिलेगा अपना कॉरिडोर- फोटो : social Media

Bihar Shiv Corridor:बिहार के पहले शिव कॉरिडोर को लेकर लंबे अरसे से चला आ रहा इंतज़ार अब खत्म होने की कगार पर है। जिस भूमि अदला-बदली के पेंच में यह परियोजना अटकी हुई थी, वह आखिरकार सुलझ गया है। रेलवे और जिला प्रशासन के बीच चली आ रही रस्साकशी पर विराम लगते ही अब शिव कॉरिडोर निर्माण की फाइलें रफ्तार पकड़ने लगी हैं। सियासी गलियारों में इसे आस्था और प्रशासन के बीच बने तालमेल के तौर पर देखा जा रहा है। 

भूमि विवाद के समाधान के बाद अब भागलपुर ज़िले के सुल्तानगंज में  उज्जैन और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर शिव कॉरिडोर के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत जिला प्रशासन ने रेलवे को तीन अलग-अलग स्थानों पर कुल 17 एकड़ 47.625 डिसमिल भूमि देने का फैसला लिया है। यह जमीन जगदीशपुर, बरारी और सुल्तानगंज क्षेत्र में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि रेलवे को भी किसी तरह की असुविधा न हो और विकास का पहिया बेखटके आगे बढ़ सके।

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प्रशासन की ओर से भूमि के फ्री ट्रांसफर से जुड़ा प्रस्ताव राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेज दिया गया है। जैसे ही विभाग से औपचारिक मुहर लगेगी, शिव कॉरिडोर निर्माण से जुड़ी आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, यह परियोजना अब काग़ज़ों से निकलकर ज़मीन पर उतरने की तैयारी में है।

शिव कॉरिडोर के साथ-साथ सुल्तानगंज में एक और अहम योजना पर भी काम तेज़ किया जा रहा है। गंगा नदी को पुरानी सीढ़ी घाट की ओर मोड़ने की योजना को जल संसाधन विभाग के ज़रिये अमली जामा पहनाया जा रहा है। इसका मक़सद घाटों के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम स्नान की सुविधा देना है।

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शिव कॉरिडोर के निर्माण से सुल्तानगंज का धार्मिक और पर्यटन नक्शा पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं, सुरक्षा और व्यवस्थित दर्शन का अनुभव मिलेगा। साथ ही स्थानीय व्यापार को नई जान मिलेगी और रोज़गार के नए मौके पैदा होंगे। सियासत की जुबान में कहें तो यह परियोजना आस्था, अर्थव्यवस्था और विकास—तीनों को एक ही धागे में पिरोने की कोशिश है, जिससे सुल्तानगंज को एक बड़े आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके।