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विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों के केन्द्र में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, कुलपति पर भाई-भतीजावाद और "पेड सीट" लागू करने का आरोप

Bihar News : सामाजिक कार्यकर्ता समरेश कुमार द्वारा सीएम और राज्यपाल को लिखे गए शिकायत पत्र को लेकर एकबार फिर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों के केन्द्र मे आ गया है। समरेश कुमार ने विश्वविद्यालय के कुलपति पर गंभीर आरोप

विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों के केन्द्र में बिहार कृषि वि
विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों के केन्द्र में BAU- फोटो : चन्द्रशेखर भगत

Bhagalpur : बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर एक बार फिर गंभीर विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों के केंद्र में आ गया है। सामाजिक कार्यकर्ता समरेश कुमार ने मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री और राज्यपाल को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर विश्वविद्यालय में कृषि अनुसंधान, निर्माण कार्यों और वित्तीय प्रबंधन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं व सरकारी राजस्व की कथित लूट का आरोप लगाया है। उन्होंने हाल ही में 25-26 मई को भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में आई आंधी-बारिश को विश्वविद्यालय की "कथित कृषि अनुसंधान व्यवस्था" की पोल खोलने वाला बताया है।


करोड़ों की एग्रो मेटेरोलॉजी मशीनें साबित हुईं शोपीस

समरेश कुमार ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि किसानों को मौसम संबंधी सटीक जानकारी देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर अत्याधुनिक एग्रो मेटेरोलॉजी मशीनें खरीदी गईं, लेकिन उनका कोई प्रभावी उपयोग नहीं हो सका। विश्वविद्यालय का मौसम विज्ञान विभाग न तो किसानों को समय पर चेतावनी दे सका और न ही खुद विश्वविद्यालय प्रशासन को संभावित नुकसान से आगाह कर पाया। परिणामस्वरूप, परिसर में पिछले तीन वर्षों में अनुसंधान परियोजनाओं के नाम पर बनाए गए कई ढांचे मामूली आंधी और बारिश में ही क्षतिग्रस्त हो गए, जो तकनीकी और वैज्ञानिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


CAG रिपोर्ट का हवाला, "आपदा में अवसर" तलाशने का आरोप

शिकायत पत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन पर अनुसंधान और निर्माण कार्यों में घटिया गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग करने का आरोप लगाया गया है। समरेश कुमार ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें खरीद प्रक्रिया, निर्माण कार्य और वित्तीय प्रबंधन में व्यापक अनियमितताओं की पुष्टि की गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब विश्वविद्यालय प्रशासन आंधी से हुए नुकसान को "आपदा में अवसर" में बदलने की तैयारी में है और ध्वस्त संरचनाओं के पुनर्निर्माण के नाम पर फिर से करोड़ों रुपये के "सुनियोजित वित्तीय खेल" की योजना बनाई जा रही है।


कुलपति पर भाई-भतीजावाद और "पेड सीट" लागू करने का आरोप

सामाजिक कार्यकर्ता ने कुलपति प्रो. दुनियां राम सिंह की कार्यशैली पर भी कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में नियुक्ति प्रक्रिया, संविदा बहाली, निविदा, कृषि पेटेंट और प्रशासनिक फैसलों में भारी अनियमितताएं हुई हैं। कुलपति ने अपने रिश्तेदारों एवं जातीय आधार पर पसंदीदा लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया और सरकारी विश्वविद्यालय में निजी विश्वविद्यालयों की तर्ज पर "पेड सीट" व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया। नियुक्तियों में लगातार उठ रहे विवादों के कारण ही सरकार को कई बहाली प्रक्रियाएं बीपीएससी (BPSC) अथवा अन्य आयोगों को सौंपनी पड़ीं।


निगरानी या सीबीआई (CBI) जांच की उठी मांग

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पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह द्वारा भी हाल ही में प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर इस विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी। समरेश कुमार ने राज्य सरकार से मांग की है कि कुलपति के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर तत्काल रोक लगाई जाए, विश्वविद्यालय में हुए निर्माण कार्यों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तथा CAG रिपोर्ट के आधार पर निगरानी विभाग या सीबीआई (CBI) से जांच शुरू कराई जाए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि "भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाने वाली सरकार दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करेगी।

चंद्रशेखर कुमार की रिपोर्ट