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भागलपुर में सवर्णों का 'महा-संग्राम': समीक्षा बैठक में भारी बवाल, UGC नियमों को 'काला कानून' बताकर प्रतिनिधियों ने किया वॉकआउट!

भागलपुर में सवर्णों का 'महा-संग्राम': समीक्षा बैठक में भारी

Bhagalpur  - भागलपुर में उच्च जातियों के विकास के लिए बुलाई गई प्रमंडल स्तरीय समीक्षा बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने यूजीसी के नए प्रावधानों को भेदभावपूर्ण और 'काला कानून' बताते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया।

समीक्षा बैठक में विकास के बजाय बवाल

भागलपुर के समीक्षा भवन में बुधवार को 'उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग' की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। बैठक की अध्यक्षता आयोग के सदस्य राजकुमार सिंह कर रहे थे, जिसमें जिला कलेक्टर और अन्य आला अधिकारी भी शामिल हुए। हालांकि, बैठक शुरू होते ही माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने यूजीसी (UGC) के नए नियमों पर चर्चा न होने और इसे सवर्ण विरोधी बताते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

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'UGC' के नए नियमों को बताया काला कानून

बैठक से बाहर निकले मुखिया मुन्ना सिंह और संजीव विधान ने केंद्र सरकार और यूजीसी के नए प्रावधानों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इन नियमों को 'काला कानून' करार दिया और आरोप लगाया कि यह सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। प्रतिनिधियों का कहना था कि सवर्ण समाज भाजपा का कोर वोटर रहा है, लेकिन आज उन्हीं के बच्चों के प्रति असुरक्षा का भाव पैदा किया जा रहा है।

सवर्ण समाज के योगदान और शोषण की चर्चा

मुखिया संजीव विधान ने भावुक होते हुए कहा कि देश के अधिकांश स्कूल और कॉलेजों के लिए जमीनें सवर्ण समाज के पूर्वजों ने ही दान की हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो समाज शिक्षा के लिए अपनी संपत्ति त्याग देता है, आज उसी समाज का शोषण क्यों किया जा रहा है। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वे किसी अन्य वर्ग के विरोध में नहीं हैं, लेकिन सवर्णों का प्रताड़न बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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आयोग के सदस्य राजकुमार सिंह की सफाई

हंगामे और वॉकआउट के बीच आयोग के सदस्य राजकुमार सिंह ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि आयोग पूरे बिहार के प्रमंडलों में जाकर सवर्णों की समस्याओं और ईडब्ल्यूएस (EWS) के कार्यान्वयन की समीक्षा कर रहा है। राजकुमार सिंह ने कहा कि भागलपुर की यह आठवीं बैठक थी और लोगों द्वारा उठाए गए मुद्दों, विशेषकर यूजीसी नियमों से जुड़ी चिंताओं को राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र तक भेजा जाएगा।

ईडब्ल्यूएस और आर्थिक बाधाओं पर चिंता

बैठक के दौरान राजकुमार सिंह ने स्वीकार किया कि सवर्ण समाज के कई बच्चे आर्थिक तंगी और ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के कारण उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि आयोग का मुख्य उद्देश्य ऐसी बाधाओं को पहचानना और सरकार को सुधार के लिए सुझाव देना है। हालांकि, प्रतिनिधियों का गुस्सा इस बात पर था कि केवल सुझावों से काम नहीं चलेगा, बल्कि नियमों में ठोस संशोधन की जरूरत है।

प्रशासनिक हलचल और भविष्य की रणनीति

बैठक में हुए इस भारी विरोध के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सवर्ण प्रतिनिधियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनके हितों की रक्षा नहीं की गई और 'काले कानूनों' को वापस नहीं लिया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। आयोग ने आश्वासन दिया है कि सभी सुझावों और विरोध की रिपोर्ट सरकार को समय पर सौंप दी जाएगी, ताकि भविष्य की नीतियों में सवर्ण समाज की भावनाओं का ख्याल रखा जा सके।

Report - anjanee kumar kashyap