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Bihar News : भागलपुर में आपदा भवन निर्माण में धांधली का आरोप, जदयू नेता प्रेम लाल दास ने उठाए सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग की

Bihar News : भागलपुर में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे आपदा भवन के निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जदयू नेता ने अनियमितताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

Bihar News : भागलपुर में आपदा भवन निर्माण में धांधली का आरोप
भवन निर्माण में धांधली का आरोप - फोटो : BALMUKUND

BHAGALPUR : करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन आपदा भवन की गुणवत्ता को लेकर जदयू अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष एवं अनुमंडल रोगी कल्याण समिति के सदस्य प्रेम लाल दास ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भवन निर्माण में मानकों की अनदेखी की जा रही है और घटिया गुणवत्ता की निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। प्रेम लाल दास ने कहा कि निर्माण कार्य में प्रयुक्त ईंट, गिट्टी, छर (स्टोन चिप्स) और सीमेंट की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। उनका आरोप है कि सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप मसाला एवं अन्य निर्माण सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती पर भविष्य में प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी भवन के निर्माण से पहले योजना का नाम, प्राक्कलित राशि, कार्य प्रारंभ एवं समाप्ति की तिथि सहित अन्य आवश्यक जानकारियों वाला शिलापट्ट लगाया जाना अनिवार्य होता है, ताकि आम लोगों को योजना की पूरी जानकारी मिल सके। लेकिन इस आपदा भवन के निर्माण में अब तक शिलापट्ट नहीं लगाया गया है, जबकि निर्माण कार्य दूसरी मंजिल तक पहुंच चुका है।

प्रेम लाल दास ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता का अभाव है और गुणवत्ता के साथ समझौता किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार निर्माण कार्य चलता रहा तो कुछ ही वर्षों में भवन में दरारें आ सकती हैं, जिससे सरकार की छवि धूमिल होगी। उनका आरोप है कि संबंधित ठेकेदार और विभागीय अधिकारी सरकार की छवि खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पूरे मामले की शिकायत सरकार एवं संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से की जाएगी तथा निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की जाएगी। वहीं, इस संबंध में निर्माण कार्य करा रही कंपनी के मुंशी आलोक निरंजन का पक्ष जानने के लिए उनसे कई बार मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसके कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। कंपनी या संबंधित विभाग का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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बालमुकुन्द की रिपोर्ट