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विकास के दावों की खुली पोल, दोन के 22 गांवों में सड़क-बिजली गायब, पोस्टर लेकर निकले लोग, पूछा- कितना वक्त और?

पश्चिम चंपारण के रामनगर विधानसभा क्षेत्र के दोन इलाकेके 22 गांव आज भी ऐसी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में हैं, जिन्हें विकास की पहली सीढ़ी माना जाता है।...

Dhon 22 Villages Protest Lack of Roads Power Water and Netwo

Bihar News: बिहार सरकार सूबे में विकास की रफ्तार तेज होने का दावा करती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से लेकर सत्ता पक्ष के नेता तक लगातार यह कहते नजर आते हैं कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में बिहार विकास की नई इबारत लिख रहा है। लेकिन पश्चिम चंपारण के रामनगर विधानसभा क्षेत्र के दोन इलाके की तस्वीर इन दावों से बिल्कुल अलग कहानी बयां करती है। यहां के 22 गांव आज भी ऐसी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में हैं, जिन्हें विकास की पहली सीढ़ी माना जाता है।

दोन इलाके के ग्रामीणों का आरोप है कि आज भी उनके गांवों में बेहतर सड़क सुविधा नहीं है। बिजली की समस्या बनी हुई है, पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और मोबाइल नेटवर्क तक की सुविधा लोगों को आसानी से उपलब्ध नहीं होती। आधुनिक दौर में जब गांवों को डिजिटल कनेक्टिविटी से जोड़ने की बात हो रही है, वहीं दोन के इन गांवों के लोग नेटवर्क के लिए भी जूझने को मजबूर बताए जा रहे हैं।

लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने इस बार विरोध का अनोखा रास्ता चुना। सड़क पर उतरकर लोगों ने अपने जनप्रतिनिधियों के पोस्टर हाथों में लेकर मार्च निकाला। प्रदर्शन में रामनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक और बिहार सरकार के मंत्री नंदकिशोर राम, केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे और वाल्मीकिनगर के सांसद सुनील कुमार के पोस्टर शामिल थे।

ग्रामीणों ने पोस्टरों के जरिए सीधे अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल किया—“दोनवासियों के विकास के लिए आखिर कितना समय चाहिए?” यह सवाल केवल एक प्रदर्शन का नारा नहीं, बल्कि उन लोगों की नाराजगी का इजहार है, जो लंबे समय से सड़क, बिजली, पानी और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग करते आ रहे हैं।

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दोन के ग्रामीणों का कहना है कि विकास की योजनाओं और सरकारी दावों की चर्चा चाहे जितनी हो, जमीन पर उनकी जिंदगी अब भी मुश्किलों से घिरी हुई है। सड़क की कमी के कारण आवागमन प्रभावित होता है, बिजली और पानी की समस्या रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बनाती है और मोबाइल नेटवर्क के अभाव में संचार व्यवस्था भी बाधित रहती है।दोनवासियों की आवाज को लेकर कांग्रेस नेता जयेश मंगल सिंह भी लगातार सक्रिय रहे हैं। बताया गया कि वे लंबे समय से क्षेत्र के लोगों को मूलभूत सुविधाएं दिलाने की मांग उठा रहे हैं। हाल में उन्होंने हजारों लोगों के साथ कैंडल मार्च निकाला था। इसके अलावा दोनवासियों के साथ नदी के बीच तिरंगा यात्रा निकालकर भी क्षेत्र की समस्याओं की ओर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई।

अब ग्रामीणों का अनोखा पोस्टर मार्च सत्ता के सामने एक सीधा सवाल खड़ा कर रहा है विकास का दावा आखिर उन 22 गांवों तक कब पहुंचेगा, जहां लोग आज भी सड़क, बिजली, पानी और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं?बिहार में विकास की तस्वीर तभी पूरी मानी जाएगी, जब दूरदराज और दुर्गम इलाकों के लोगों तक भी सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचे। फिलहाल दोन के 22 गांवों के ग्रामीणों का सवाल हवा में तैर रहा है हमें और कितना इंतजार करना होगा?