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अब नीलाम होगा डीएम दफ्तर? कोर्ट ने दिया समाहरणालय को कुर्क करने का आदेश, प्रशासन में मचा हड़कंप'

औरंगाबाद न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में जिला समाहरणालय को कुर्क करने का आदेश दिया है। पर्याप्त समय मिलने के बाद भी डिक्री राशि का भुगतान न करने पर सिविल जज डॉ. दीवान फहद की कोर्ट ने यह कड़ी कार्रवाई की है।

अब नीलाम होगा डीएम दफ्तर? कोर्ट ने दिया समाहरणालय को कुर्क क

N4N Desk - औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रथम, डॉ. दीवान फहद की कोर्ट ने बुधवार को एक कड़ा रुख अपनाते हुए जिला समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) को कुर्क करने का आदेश जारी किया है। यह आदेश एक पुराने 'इजराय वाद' में डिक्री (न्यायिक आदेश) का अनुपालन न होने और संबंधित राशि का भुगतान डिक्रीधारी अधिवक्ता हरेकृष्ण प्रसाद को न करने के कारण दिया गया है। न्यायालय ने माना कि प्रशासन को पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद डिक्री राशि का भुगतान नहीं किया गया, जिससे वाद का निस्तारण लंबे समय से लंबित है।

प्रशासन की लापरवाही पड़ी भारी 

मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि न्यायालय ने 14 नवंबर 2025 को ही कारण पृच्छा नोटिस जारी किया था। इसके जवाब में दिसंबर 2025 में अपर समाहर्ता और जिला विधि शाखा की ओर से प्रतिवेदन तो प्राप्त हुआ, लेकिन उसमें भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। इसके बाद भी सरकारी अधिवक्ता (GP) द्वारा बार-बार समय की मांग की गई, लेकिन 5 फरवरी 2026 तक भी राशि का भुगतान सुनिश्चित नहीं हो सका। न्यायालय ने इसे सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन माना, जो प्राचीनतम वादों के त्वरित निष्पादन पर जोर देते हैं।

15 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट, नीलामी की भी संभावना 

न्यायालय ने व्यवहार न्यायालय के नाजिर को स्पष्ट निर्देश दिया है कि समाहरणालय की संपत्ति को नियमानुसार कुर्क करें और 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट न्यायालय में पेश करें। अधिवक्ता के अनुसार, यदि इस आदेश के बाद भी भुगतान नहीं होता है, तो समाहरणालय की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 9 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

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डीएम अभिलाषा शर्मा का बयान 

इस बड़े प्रशासनिक संकट पर औरंगाबाद की जिलाधिकारी (DM) अभिलाषा शर्मा ने कहा कि वे इस आदेश की समीक्षा करवाएंगी। उन्होंने बताया कि मामले की पूरी जानकारी ली जा रही है और न्यायालय के आदेश के आलोक में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कलेक्ट्रेट जैसी महत्वपूर्ण सरकारी इमारत की कुर्की का आदेश राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है।