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Bihar News : बिहार में हेल्थ सिस्टम की ऐसी तैसी ! भोजपुर के सरकारी अस्पताल में मोबाइल की टॉर्च में लगाए गए टांके, मीडिया के पहुँचने पर चालू हुआ जेनरेटर

Bihar News : भोजपुर के सरकारी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे जख्मी मरीज का इलाज और टांके लगाने का काम स्वास्थ्यकर्मियों व गार्ड द्वारा मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर किया गया।

Bihar News : बिहार में हेल्थ सिस्टम की ऐसी तैसी ! भोजपुर के
बदहाल हेल्थ सिस्टम - फोटो : ASHISH

ARA : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कोईलवर में सोमवार को बिजली गुल होने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली सामने आई। इमरजेंसी में पहुंचे मरीज का इलाज स्वास्थ्यकर्मियों ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी में किया। इतना ही नहीं अस्पताल में भर्ती दो मरीजों को भी अंधेरे में ही आरएल पानी चढ़ाया जा रहा था। बिजली कटने के बावजूद जेनरेटर बंद रहने से मरीज और उनके परिजन परेशान रहे। कोईलवर निवासी मोनू ने बताया कि दोस्त का अंगूठे के पास चाकू से कट गया था। जख्मी हालत में वह इलाज के लिए शाम करीब पांच बजे सीएचसी कोईलवर पहुंचा। उस समय अस्पताल की बिजली कटी हुई थी। जेनरेटर भी चालू नहीं किया गया। इसके बाद अस्पताल के गार्ड ने मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी जलाया। उसके बाद स्वास्थ्यकर्मी ने उसी लाइट में उसके दोस्त के जख्म पर टांका लगाया। अंधेरे में इलाज होने से मरीज और उसके परिजनों में व्यवस्था को लेकर नाराजगी देखी गयी। वहीं महिला मरीज के परिजन अजय सिंह ने बताया कि शाम करीब पांच बजे से ही बिजली कटी हुई थी। जेनरेटर बंद रहने के कारण अंधेरे में ही इलाज कराना पड़ा। अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों को काफी देर तक परेशानी झेलनी पड़ी।

मीडिया कर्मियों के पहुंचने के बाद चालू हुआ जेनरेटर

अस्पताल में बिजली व्यवस्था की स्थिति की जानकारी लेने के लिए मीडिया कर्मियों के पहुंचने के बाद करीब 35 मिनट तक जेनरेटर चालू नहीं हुआ। इसके बाद जेनरेटर में तेल डलवाया गया और उसे चालू कराया गया। अस्पताल के एक गार्ड ने बताया कि जेनरेटर का तेल खत्म हो गया था, जिसके कारण वह चालू नहीं हो सका। हालांकि इस संबंध में अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मी कुछ भी बोलने से परहेज करते नजर आए। जेनरेटर के रखरखाव और समय पर संचालन को लेकर अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पहले भी सामने आ चुकी है ऐसी स्थिति

कोईलवर निवासी राकेश शर्मा ने बताया कि वह अपने मित्र के साथ उनके रिस्तेदार का इलाज कराने के लिए सीएचसी कोईलवर आए थे। यहां करीब आधे घंटे से बिजली कटी हुई थी। इसी दौरान उन्होंने देखा कि मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में बच्ची को टांका लगाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि अस्पताल में इस तरह की अनियमितता कोई नई बात नहीं है। आए दिन ऐसी स्थिति देखने को मिलती है। उन्होंने बताया कि अस्पताल के मैनेजर और प्रभारी को कई बार फोन कर चुके हैं। उनके मोबाइल में फोन करने का रिकॉर्ड भी है। उन्होंने कहा कि कई बार फोन करने के बावजूद कोई रिस्पॉन्स नहीं मिलता है। उन्होंने बताया कि बिजली कटने के बाद जानकारी मिली कि जेनरेटर में तेल खत्म है। इसके बाद तेल लाकर जेनरेटर में डाला गया। तब जाकर बिजली की शुरू हो सकी। 

परिजनों का आरोप

सीएचसी कोईलवर में मोबाइल की रोशनी में मरीजों के इलाज का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बिजली कटने के दौरान जेनरेटर समय पर चालू नहीं किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों के परिजनों का आरोप है कि बिजली गुल होने के बावजूद जेनरेटर नहीं चलाया जाता, जिसके कारण इमरजेंसी सेवाएं तक प्रभावित होती हैं और मरीजों को मोबाइल की रोशनी में इलाज कराने को मजबूर होना पड़ता है। अस्पताल आए एक मरीज के रिश्तेदार ने नाम नहीं छापने की शर्त पर आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन और जेनरेटर कर्मी की मिलीभगत के कारण बिजली कटने के बाद भी जेनरेटर समय पर नहीं चलाया जाता। उनका आरोप है कि जेनरेटर नहीं चलने के बावजूद रजिस्टर में उसका पूरा रिकॉर्ड मेंटेन किया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से हम पुष्टि नहीं करते हैं। इमरजेंसी जैसी महत्वपूर्ण सेवा में पर्याप्त रोशनी के अभाव में मरीजों का इलाज होना अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से बिजली कटने की स्थिति में तत्काल जेनरेटर चालू कराने और व्यवस्था में सुधार की मांग की है। जब इस संबंध में भोजपुर सिविल सर्जन से दूरभाष पर बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।

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आशीष की रिपोर्ट