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Bihar News : आरा सदर अस्पताल में मुफ्त दवाओं के खेल पर फूटा परिजनों का गुस्सा, ओपीडी में जमकर काटा हंगामा

Bihar News : आरा सदर अस्पताल में मुफ्त दवाओं के खेल पर फूटा
मुफ्त दवाओं का खेल- फोटो : ASHISH

ARA : बिहार के स्वास्थ्य सिस्टम को ठेंगा दिखाते हुए आरा सदर अस्पताल एक बार फिर अपने नए कारनामे को लेकर सुर्खियों में है। सरकार की ओर से अस्पताल में मरीजों को मुफ्त देने के लिए 400 से अधिक प्रकार की दवाइयां उपलब्ध कराई गई हैं। इसके बावजूद, अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और ओपीडी में सक्रिय दलालों के गठजोड़ के कारण गरीब मरीजों को मुफ्त दवाएं नसीब नहीं हो पा रही हैं। डॉक्टर और दलालों की कथित मिलीभगत से मरीजों के परिजनों को बाहर से महंगी दवाएं और इंजेक्शन खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

इसी व्यवस्था के खिलाफ बीते दिन सदर अस्पताल के ओपीडी परिसर में मरीज के परिजनों ने जमकर हंगामा किया। मिली जानकारी के अनुसार, रोज मोहल्ले की रहने वाली नेहा कुमारी की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। परिजन आनन-फानन में उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल के ओपीडी लेकर पहुंचे। वहां तैनात डॉक्टर ने मरीज की जांच तो की, लेकिन इलाज के बाद अस्पताल में मुफ्त मिलने वाले इंजेक्शन को बाहर की प्राइवेट दुकान से खरीद कर लाने का फरमान सुना दिया।

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डॉक्टर के इस रवैये को देखकर मरीज के परिजन भड़क उठे और उन्होंने अस्पताल परिसर में ही हंगामा करना शुरू कर दिया। परिजनों का साफ तौर पर कहना था कि जब सरकार की तरफ से सारी दवाएं और सुई मुफ्त में उपलब्ध हैं, तो जानबूझकर उन्हें बाहर क्यों भेजा जा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टरों और स्थानीय दवा दुकानदारों व दलालों के बीच कमीशन का खेल चल रहा है, जिसके कारण गरीब मरीजों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। आक्रोशित परिजनों ने कहा की "अस्पताल में बोर्ड लगा है कि दवाएं मुफ्त हैं, लेकिन डॉक्टर पर्चे पर ऐसी दवाएं लिखते हैं जो सिर्फ बाहर मिलती हैं। जब गरीब मरीज यहां आता है, तो उसे मुफ्त इलाज के बजाय लूट का शिकार होना पड़ता है।"

इस पूरे गंभीर मामले पर जब अस्पताल प्रशासन का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो हमेशा की तरह उदासीनता ही हाथ लगी। सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. शिवेंद्र कुमार सिन्हा से उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। सिविल सर्जन के फोन न उठाने के कारण इस धांधली पर अस्पताल प्रबंधन का आधिकारिक रुख सामने नहीं आ सका है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि आरा सदर अस्पताल में दलालों का नेटवर्क बेहद मजबूत हो चुका है और इस पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है। आए दिन मरीजों को बाहर की दवाएं लिखे जाने की शिकायतें आती रहती हैं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस सिंडिकेट पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे या गरीब मरीज यूं ही दलालों के हाथों लुटते रहेंगे? 

आशीष की रिपोर्ट