Bhojpur Encounter: भोजपुर में एनकाउंटर पर बवाल, सड़कों पर लोगों का फूटा गुस्सा, पत्थबाजी के बाद पुलिस ने चटकाई लाठी, इलाके में भयंकर तनाव
Bhojpur Encounter: युवक की मौत के बाद इलाके में आक्रोश इस कदर भड़क उठा कि लोगों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

Bhojpur Encounter: भोजपुर के आरा में भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला अब महज एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि बड़ा जनविवाद बन गया है। युवक की मौत के बाद इलाके में आक्रोश इस कदर भड़क उठा कि लोगों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कई जगहों पर प्रदर्शन हुए, पुलिस टीम पर पथराव किया गया, जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ने की कोशिश की। पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में भरत तिवारी की मौत और उससे जुड़े कई अनुत्तरित सवाल हैं। दरअसल, पुलिस ने पहले भरत तिवारी को मानसिक रूप से अस्वस्थ या विक्षिप्त बताया था। दावा किया गया था कि उसका इलाज मानसिक आरोग्यशाला में चल चुका है। लेकिन अब यही बात पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान खड़े कर रही है।
स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि यदि युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ था तो उसे काबू करने और इलाज की व्यवस्था करने के बजाय एनकाउंटर जैसी कार्रवाई क्यों की गई? लोगों का यह भी कहना है कि आमतौर पर पुलिस किसी आरोपी को निष्क्रिय करने के लिए पैरों में गोली मारती है, लेकिन भरत तिवारी को कथित तौर पर कई गोलियां लगीं। इसी बिंदु को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और विभिन्न दावों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, जबकि पुलिस की ओर से अभी तक पूरे घटनाक्रम का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में अफवाहों और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
बढ़ते विवाद के बीच प्रशासन ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लापरवाही और कर्तव्यहीनता के आरोपों के बाद शाहपुर थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया है। इस फैसले को प्रशासन की ओर से जवाबदेही तय करने की दिशा में शुरुआती कदम माना जा रहा है, लेकिन इससे लोगों का गुस्सा पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।
उधर, भरत तिवारी के शव का पोस्टमार्टम पटना पीएमसीएच में कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। सवाल सिर्फ एक युवक की मौत का नहीं, बल्कि पुलिस बल प्रयोग की सीमा, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों से निपटने की नीति और कानून के राज पर जनता के भरोसे का भी है। फिलहाल भोजपुर में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। लोगों की निगाहें अब जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्योंकि इस एनकाउंटर के पीछे का पूरा सच सामने आए बिना उठ रहे सवालों का शोर थमने वाला नहीं है।
रिपोर्ट- आशीष कुमार
















