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'डीएम के वेतन से 5 लाख काटकर दें मुआवजा'... छात्रा की गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, NSA लगाना बताया अवैध

कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम को आकृति चौधरी को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। यह राशि जिलाधिकारी के वेतन से अदा की जाएगी।

Akriti Chaudhary
Akriti Chaudhary- फोटो : news4nation

Highcourt News : एक छात्रा को श्रमिक आन्दोलन का मास्टर माइंड बताकर गिरफ्तार करने और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने के मामले में हाई कोर्ट ने एक जिलाधिकारी पर सख्त फरमान जारी किया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए श्रमिक आंदोलन के मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई हिरासत को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में उनकी जरूरत नहीं है तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने आकृति की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम को आकृति चौधरी को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। यह राशि जिलाधिकारी के वेतन से अदा की जाएगी। गौरतलब है कि आकृति चौधरी के पिता ज्ञानेश कुमार (1988 बैच के रिटायर्ड आईएएस) वर्तमान में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) हैं। इसके अलावा, उनके पति मनीष बंसल भी 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश में कार्यरत हैं।

हिरासत के आधार पर कोर्ट ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आकृति को एनएसए के तहत निरुद्ध करने के आधार, पुलिस की कार्रवाई के समर्थन में मौजूद साक्ष्य और संबंधित दस्तावेज सरकार से मांगे थे। इन दस्तावेजों की जांच के बाद अदालत ने पाया कि हिरासत को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त आधार और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। अदालत ने यह भी पड़ताल की कि आकृति के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने से पहले शांति भंग की आशंका को लेकर उन्हें कोई नोटिस दिया गया था या नहीं। इसके अलावा पुलिस द्वारा पेश किए गए कथित भड़काऊ वीडियो और व्हाट्सऐप चैट से जुड़ी सामग्री की भी जांच की गई।

श्रमिक आंदोलन में हिंसा भड़काने का लगा था आरोप

पुलिस के मुताबिक, 13 अप्रैल को वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर नोएडा में बड़ी संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतरे थे। इसी दौरान आकृति चौधरी पर प्रदर्शनकारियों को उकसाने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने उन्हें 'मजदूर बिगुल दस्ता' का सक्रिय सदस्य बताते हुए आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और आगजनी में उनकी भूमिका का भी आरोप लगाया था। हालांकि, हाईकोर्ट के समक्ष इन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके। अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर निरुद्धि को कानूनी कसौटी पर खरा नहीं पाया और उसे रद्द कर दिया।

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11 अप्रैल को हुई थी गिरफ्तारी

पुलिस ने आकृति चौधरी को 11 अप्रैल को नोएडा के बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया था। इसके बाद मई में उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की गई। वह करीब पांच महीने से हिरासत में थीं। कोर्ट के आदेश के बाद अब उन्हें तत्काल रिहा करने का रास्ता साफ हो गया है, बशर्ते किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी आवश्यक न हो।