LATEST NEWS

  • Bihar Road Accident: 20 फीट गहरे तालाब में समाई तेज रफ्तार स्कॉर्पियो, एक की मौत, दूसरे की तलाश जारी
  • Bihar Road Accident: 20 फीट गहरे तालाब में समाई तेज रफ्तार स्कॉर्पियो, एक की मौत, दूसरे की तलाश

  • Bihar Teachers May Get Salaries Directly From Treasury
  • Bihar Education News:बिहार में विश्वविद्यालय शिक्षकों के वेतन भुगतान का बदलेगा तरीका, अब सीधे खाते में आएगी सैलरी

  • Patna Electricity News:पटना में बिजली की बढ़ती मांग से निपटने की तैयारी, 15 नए पावर सब स्टेशन से मिलेगी राहत
  • Patna Electricity News:पटना में बिजली की बढ़ती मांग से निपटने की तैयारी, 15 नए पावर सब स्टेशन से

  • खौफनाक षड्यंत्र का पर्दाफाश
  • Bihar Crime: खौफनाक षड्यंत्र का पर्दाफाश, आपसी रंजिश में रची गई थी ऐसे निर्दोष को सलाखों के पीछे

  •  IAS Kumar Ravi
  • Bihar Food Safety: बिहार में शुद्ध के लिए महायुद्ध, सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर खाद्य सुरक्षा

'सरकार मुर्दाबाद' का नारा लगाना गुनाह नहीं... सरकार की नीतियों से जरूरी नहीं सबकी सहमति, खुलकर करें विरोध, कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि नागरिकों को सरकार की नीतियों का विरोध करने और अपनी असहमति व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है।

 Anti-Government Slogans
Anti-Government Slogans- फोटो : news4nation

Anti-Government Slogans:  लोकतंत्र में असहमति और विरोध के अधिकार को लेकर न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी नागरिक को केवल इसलिए उसके शहर या क्षेत्र से बाहर (Extern) नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने सरकार के फैसलों का विरोध किया या सरकार के खिलाफ नारे लगाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसी कार्रवाई संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। 

यह टिप्पणी बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस माधव जामदार ने उस समय की, जब वे सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महाराष्ट्र महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। मुंबई पुलिस ने उन्हें एक वर्ष के लिए मुंबई और उसके उपनगरों की सीमा से बाहर रहने का आदेश दिया था, जिसे हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया।

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि नागरिकों को सरकार की नीतियों का विरोध करने और अपनी असहमति व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है। जस्टिस जामदार ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा कि यदि कोई व्यक्ति "सरकार मुर्दाबाद" जैसे नारे लगाता है, तो क्या केवल इसी आधार पर उसे शहर से बाहर किया जा सकता है? उन्होंने कहा कि पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि लोकतांत्रिक विरोध को दबाना। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की भूमिका पर भी कड़ी टिप्पणी की। जस्टिस जामदार ने कहा कि पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की नहीं, बल्कि जनता की सेवक है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि हर विरोध पर मुकदमे दर्ज किए जाएंगे, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी।

क्या था मामला?

याचिकाकर्ता सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी के खिलाफ वर्ष 2019 से 2024 के बीच कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। ये मामले मुख्य रूप से विभिन्न सरकारी नीतियों के खिलाफ आयोजित धरना-प्रदर्शनों और रैलियों से जुड़े थे। इनमें नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC), बाबरी मस्जिद विध्वंस, ज्ञानवापी मस्जिद विवाद, वक्फ बोर्ड में कथित भ्रष्टाचार और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध से जुड़े प्रदर्शन शामिल थे। इन मामलों के आधार पर महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत उन्हें 12 महीने के लिए मुंबई से बाहर करने का आदेश जारी किया गया था।

NSIT
Nsmch

संविधान और नागरिकों के अधिकार

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होकर विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 21 गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार की रक्षा करता है। अदालत ने माना कि केवल विरोध प्रदर्शन या सरकार की आलोचना करना किसी व्यक्ति को उसके निवास क्षेत्र से निष्कासित करने का वैध आधार नहीं हो सकता।

यह फैसला लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन कानून के दायरे में और शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या अन्य दंडनीय अपराधों में शामिल होता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।