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बलात्कारियों की रिहाई पर क्या बोले थे शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी जिसका प्रियंका गाँधी ने संसद में किया जिक्र तो मचा बवाल, पढ़िए पूरा बयान

त्कालीन केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने अगस्त 2022 में गुजरात सरकार द्वारा बिलकिस बानो गैंगरेप मामले के 11 दोषियों की रिहाई के फैसले पर जो बयान दिया था उसे लेकर प्रियंका गाँधी ने उन्हें सदन में घेरा.

Priyanka Gandhi on Prahlad Joshi
Priyanka Gandhi on Prahlad Joshi- फोटो : news4nation

Priyanka Gandhi :  केंद्र सरकार में नए शिक्षा मंत्री बनाए गए प्रह्लाद जोशी का एक पुराना बयान एक बार फिर सियासी विवाद के केंद्र में आ गया है। गुजरात के चर्चित बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई को लेकर दिया गया उनका बयान संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया। विपक्ष ने इस बयान का हवाला देते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला, जबकि भाजपा ने विपक्ष पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। मंगलवार को संसद में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ।

दरअसल, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी है, जिसने एक गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि इससे देश की करोड़ों बेटियों को क्या संदेश जाएगा। राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश की।

क्या था प्रह्लाद जोशी का बयान?

विवाद की जड़ अगस्त 2022 में गुजरात सरकार द्वारा बिलकिस बानो गैंगरेप मामले के 11 दोषियों की रिहाई का फैसला है। उस समय तत्कालीन केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी से मीडिया ने इस निर्णय पर प्रतिक्रिया मांगी थी। 'बीबीसी' एक रिपोर्ट के मुताबिक 'एनडीटीवी' से बातचीत में उन्होंने कहा था, "जब सरकार और संबंधित लोगों ने फैसला ले लिया है, तो मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता क्योंकि यह कानून की प्रक्रिया है।" उन्होंने यह भी कहा था कि जो कैदी लंबे समय तक जेल में रह चुके हैं, उनके लिए कानून में सजा में छूट और रिहाई का प्रावधान है। इसी बयान को अब विपक्ष उनके खिलाफ राजनीतिक मुद्दा बना रहा है।

क्या है बिलकिस बानो मामला?

साल 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। इस हिंसा में उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या भी कर दी गई थी। मामले की जांच के बाद मुंबई की सीबीआई की विशेष अदालत ने वर्ष 2008 में 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा। अगस्त 2022 में गुजरात सरकार ने राज्य की छूट नीति के तहत सभी 11 दोषियों को रिहा कर दिया था। इस फैसले की देशभर में व्यापक आलोचना हुई, उसी दौरान प्रहलाद जोशी का बयान आया था और  बाद में रिहाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जनवरी 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात सरकार के रिहाई आदेश को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया और सभी दोषियों को दोबारा जेल लौटने का निर्देश दिया।

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शिक्षा मंत्री बनने के बाद फिर घिर गए जोशी

नीट पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पश्चात 25 जुलाई को प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद विपक्ष ने उनके पुराने बयान को फिर से उठाना शुरू कर दिया। मंगलवार को संसद में प्रियंका गांधी के बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहा है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जोरदार हंगामा हुआ।

अब प्रह्लाद जोशी का चार साल पुराना बयान एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में है। विपक्ष इसे महिलाओं की सुरक्षा और सरकार की संवेदनशीलता से जोड़कर सवाल उठा रहा है, जबकि भाजपा का कहना है कि जोशी ने केवल उस समय लागू कानूनी प्रक्रिया का उल्लेख किया था, न कि अपराध का समर्थन किया था।