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Dearness: महंगाई की मार या सब महंगा सी, थोक और खुदरा मुद्रास्फीति में भारी उछाल से लोग बेहाल

Dearness:देश में एक बार फिर महंगाई का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ने लगा है। ...

Wholesale Inflation Rises
थोक और खुदरा मुद्रास्फीति में भारी उछाल- फोटो : social Media

Dearness:देश में एक बार फिर महंगाई का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ने लगा है। खाद्य उत्पादों, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं के दाम बढ़ने के कारण अगस्त महीने में थोक मुद्रास्फीति (WPI) बढ़कर 9.92 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो जुलाई में 9.78 प्रतिशत थी। इसके साथ ही, खुदरा मुद्रास्फीति भी जुलाई के 4.45% से बढ़कर अगस्त में 4.82 प्रतिशत हो गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी इन आंकड़ों ने आम आदमी की जेब पर बढ़ते बोझ को उजागर कर दिया है।

थोक और खुदरा महंगाई में वृद्धि: अगस्त में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 9.92% और खुदरा मुद्रास्फीति 4.82% पर जा पहुंची है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुख्य अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल के अनुसार, प्रतिकूल आधार प्रभाव और चीनी जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण सितंबर और अक्टूबर में खाद्य महंगाई के और बढ़ने की आशंका है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘प्रधानमंत्री कहते रहते हैं- सब चंगा सी, लेकिन हकीकत में सब महंगा सी।’

 कांग्रेस का दावा है कि महंगाई के अनुपात में मजदूरी में लगातार गिरावट आई है। अप्रैल से वास्तविक मजदूरी में 5.7% और ग्रामीण भारत में 9 प्रतिशत की बड़ी कमी दर्ज की गई है।थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई लगातार चार महीनों से 10 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है, जिससे जरूरी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं।जयराम रमेश ने कहा कि लगातार चार महीने से महंगाई उच्च स्तर पर बनी हुई है, जिससे करोड़ों परिवारों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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बढ़ती थोक और खुदरा महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। एक तरफ जहां सरकार अर्थव्यवस्था के मजबूत होने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतें और घटती वास्तविक मजदूरी देश के निम्न और मध्यम वर्ग के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है। आने वाले त्योहारी सीजन में यदि कीमतों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।