LATEST NEWS

  • Bihar MLC election
  • Bihar MLC election: पटना में नीरज कुमार की निर्णायक बढ़त, तिरहुत में बंसीधर ब्रजवासी ने JDU को चौंकाया,

  • Bihar MLC Election Results 2026 Winners and Analysis
  • Bihar MLC election: बिहार MLC चुनाव में बड़ा उलटफेर! BJP के दिग्गज नवल किशोर यादव हारे, जन सुराज

  • Saharsa News
  • Saharsa News: सहरसा में पीएम आवास योजना की सूची में गड़बड़ी की शिकायत, आवास सहायक से जवाब तलब

  • Patna Constituency Election
  • Patna Constituency Election: पटना स्नातक चुनाव में राजद और जदयू के बीच कड़ा मुकाबला, 72 वोटों का अंतर

  • Kosi election
  • Kosi election: कोसी स्नातक सीट पर पांचवें राउंड की गिनती पूरी, जानें भाजपा, राजद और जन सुराज के

Urea Rate: बुवाई से पहले बड़ा संकट, होर्मुज में संकट से भारत में खतरा! यूरिया सप्लाई पर दबाव, फसल और कीमतों पर मंडरा रहा संकट

Urea Rate:शिपिंग मार्गों में आई रुकावट ने भारत की खाद आपूर्ति पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे आने वाले बुवाई सीज़न में पैदावार घटने और खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका गहराने लगी है।...

Sowing Hit by Hormuz Crisis Urea Supply Fears Rise in India
फसल और कीमतों पर मंडरा रहा संकट- फोटो : social Media

Urea Rate:मध्य पूर्व में जारी जंग ने अब सियासत के साथ-साथ खेती-किसानी के मैदान में भी हलचल मचा दी है। शिपिंग मार्गों में आई रुकावट ने भारत की खाद आपूर्ति पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे आने वाले बुवाई सीज़न में पैदावार घटने और खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका गहराने लगी है। हालात की नज़ाकत को भांपते हुए प्रधानमंत्री मोदी  ने भरोसा दिलाया है कि सरकार पूरी तरह मुस्तैद है और किसानों के हितों की हिफ़ाज़त के लिए हर मुमकिन कदम उठाए जा रहे हैं।

दरअसल, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खाद उपभोक्ता है और कच्चे माल से लेकर तैयार खाद तक के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई, जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते गुजरती है, मौजूदा तनाव के चलते प्रभावित हो रही है। यही वजह है कि बाज़ार में बेचैनी और अनिश्चितता का माहौल बनता दिख रहा है।

सियासी और आर्थिक हलकों में यह बहस तेज़ है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो खाद संकट गहरा सकता है। फिलहाल सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 62 लाख टन यूरिया का स्टॉक मौजूद है, जो सामान्य परिस्थितियों में पर्याप्त माना जा रहा है। लेकिन जून-जुलाई के बुवाई सीज़न के करीब आते ही मांग अपने चरम पर पहुंचती है, ऐसे में सप्लाई में मामूली झटका भी बड़े असर का सबब बन सकता है।

यूरिया जैसी नाइट्रोजन आधारित खाद धान और गेहूं जैसी अहम फसलों के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती है। भारत हर साल करीब 4 करोड़ टन यूरिया इस्तेमाल करता है, जिस पर सरकार भारी सब्सिडी देती है। अगर आपूर्ति में बाधा आई तो किसानों के बुवाई के फैसले प्रभावित हो सकते हैं और इसका सीधा असर खाद्य उत्पादन पर पड़ेगा।

NSIT
Nsmch

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्टॉक से फिलहाल स्थिति काबू में है, लेकिन लंबी अवधि में संकट गहरा सकता है। प्राकृतिक गैस, जो यूरिया उत्पादन का मुख्य आधार है, उसका 85 फीसदी आयात होता है और यही कड़ी सबसे ज़्यादा दबाव में है। कुछ कंपनियों ने गैस आपूर्ति घटने के चलते उत्पादन भी कम कर दिया है।

इस पूरे परिदृश्य में सरकार ने आयात स्रोतों में विविधता लाने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। वहीं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

हालांकि, यह संकट सिर्फ आपूर्ति तक सीमित नहीं है वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतें सरकार के सब्सिडी बोझ को भी बढ़ा सकती हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह जंग कब थमेगी, क्योंकि उसी पर तय होगा कि खेतों में हरियाली बरकरार रहेगी या महंगाई की आंधी सब कुछ झकझोर देगी।