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शिवकुमार सरकार में कलह शुरू, कैबिनेट मंत्री ने सौंपा इस्तीफा, कांग्रेस में मचा सियासी हलचल

रेड्डी ने कहा कि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग दिए जाने का आश्वासन मिला था, लेकिन पोर्टफोलियो आवंटन में ऐसा नहीं हुआ। इसी वजह से उन्होंने मंत्री पद छोड़ने का फैसला किया।

Ramalinga Reddy
Ramalinga Reddy- फोटो : news4nation

Ramalinga Reddy : कर्नाटक की राजनीति में शुक्रवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कैबिनेट से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। पोर्टफोलियो आवंटन को लेकर नाराजगी जताते हुए रेड्डी ने मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि वह अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम नहीं कर सकते, इसलिए मंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं। 

उन्होंने पत्र में अनुरोध किया कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह विधायक बने रहेंगे और कांग्रेस पार्टी के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। मीडिया से बातचीत में रेड्डी ने कहा कि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग (Bengaluru Development Portfolio) दिए जाने का आश्वासन मिला था, लेकिन पोर्टफोलियो आवंटन में ऐसा नहीं हुआ। इसी वजह से उन्होंने मंत्री पद छोड़ने का फैसला किया।

उन्होंने कहा, “मैंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। मैं आज भी पार्टी के साथ हूं और पिछले 53 वर्षों से कांग्रेस का सदस्य हूं। इस दौरान मैंने संगठन और सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। पूर्व मुख्यमंत्रियों एम. वीरप्पा मोइली और एस. एम. कृष्णा की सरकारों में भी मंत्री के रूप में काम किया है। मैंने कभी किसी से मंत्री पद की मांग नहीं की।” ऐसे में रेड्डी के इस्तीफे को कांग्रेस सरकार के भीतर बढ़ते असंतोष के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं।

दरअसल, रेड्डी को जल संसाधन दिया गया, जबकि कृष्णा बायरे गौड़ा को बेंगलुरु डेवलपमेंट मिला लेकिन यह पोर्टफोलियो रेड्डी ने मांगा था। पोर्टफोलियो न मिलने से नाराज़ रेड्डी ने कहा कि वह अपनी "अंतरात्मा" के खिलाफ काम नहीं कर सकते। बेंगलुरु के अलग अलग सीट से आठ बार के MLA ने कहा कि उन्हें दो बार पोर्टफोलियो देने का वादा किया गया था। सिद्धारमैया (2023 में) और शिवकुमार (2023 और 2026 में) दोनों ने अपनी मर्ज़ी से यह ऑफर किया था, लेकिन दोनों बार ऑफिशियल लिस्ट में इसे बदल दिया गया।

वहीं रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे पर CM शिवकुमार ने कहा, 'हम इसे सुलझा लेंगे' । वहीं प्रेस मीट से पहले, KPCC चीफ बी के हरिप्रसाद के दूत ने रामलिंगा रेड्डी को पार्टी चीफ से बात करने और प्रेस मीट रद्द करने के लिए मनाने की कोशिश की। लेकिन, सीनियर नेता अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने न केवल प्रेस के सामने आकर अपनी नाराजगी जाहिर की बल्कि उन्होंने यहां तक कहा कि वे अपनी  "अंतरात्मा" के खिलाफ काम नहीं कर सकते।

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