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'RSS कर रहा शिक्षा विभाग के सहारे संगठन विस्तार', पेपर लीक संशोधन बिल पर कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला

विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर शिक्षा के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार सुधार की बजाय केवल कानून में संशोधन कर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है।

 Gaurav Gogoi
Gaurav Gogoi- फोटो : news4nation

Paper Leak Amendment Bill  : लोकसभा में मंगलवार को 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' यानी पेपर लीक संशोधन बिल पर चर्चा शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। कांग्रेस ने संशोधन विधेयक को "दिखावटी" करार देते हुए सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को सुधारने में विफल रहने का आरोप लगाया, जबकि केंद्र सरकार ने इसे छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। चर्चा की शुरुआत में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधेयक पर छह घंटे की चर्चा का समय निर्धारित किया था। हालांकि सभी दलों की सहमति के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने चर्चा का समय बढ़ाकर आठ घंटे कर दिया। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सरकार 10 घंटे तक चर्चा कराने के लिए भी तैयार है।

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर शिक्षा के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार सुधार की बजाय केवल कानून में संशोधन कर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है। गोगोई ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में इसी विषय पर कानून बनने के बावजूद 2026 में भी पेपर लीक की घटनाएं हुईं, जिससे स्पष्ट है कि पिछला कानून प्रभावी साबित नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर होती तो परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करती।

RSS के लिए शिक्षा विभाग अहम

गोगोई ने कहा, RSS के लिए शिक्षा विभाग अहम गौरव गोगोई ने कहा- 'आप सुधार नहीं चाहते, क्योंकि RSS के लिए शिक्षा विभाग अहम है। आप चाहते हैं कि शिक्षा के माध्यम से इस पीढ़ी के लोग आपके संगठन के सदस्य बने। डीयू, IIT, जेएनयू ने अपने स्टूडेंट्स ने कहा कि प्रदर्शन में मता जाओ। क्या ऐसे हम आने वाले भारत का निर्माण करेंगे। गौरव ने कहा, ‘राहुल गांधी ने बार-बार कहा कि प्रधान सिर्फ एक मुखौटा हैं। उनके हटने से भी शिक्षा में सुधार आएगा, इसका विश्वास न हमें है, न बच्चों को। बच्चे क्या करें। उनके पास पैसे नहीं है कि 30-30 लाख में पैसे खरीद सकें। वे नाराज हैं। जब वे लड़ नहीं पाते तो आत्महत्या कर लेतें हैं।’

NTA और शिक्षा मंत्रालय पर सवाल

कांग्रेस सांसद ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब NTA के महानिदेशक (DG) को बदला गया तो चेयरमैन को क्यों नहीं हटाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पेपर लीक के मूल कारणों—प्रिंटिंग नेटवर्क, परीक्षा माफिया और कोचिंग माफिया—पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की। गोगोई ने यह भी कहा कि 2024 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार 45 आरोपियों में से 44 को जमानत मिल चुकी है, जबकि कथित मास्टरमाइंड भी गिरफ्तार होने के बाद जमानत पर बाहर है। उन्होंने कहा कि इससे सरकार की कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल उठते हैं।

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शिक्षा मंत्री पर भी साधा निशाना

कांग्रेस ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि 2024 और 2026 दोनों मामलों में सरकार ने शुरुआत में पेपर लीक से इनकार किया। गोगोई ने दावा किया कि पेपर लीक से निराश होकर कई छात्रों ने आत्महत्या तक की और सरकार उनकी चिंताओं को समझने में विफल रही।

सरकार ने बताया जरूरी संशोधन

विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हाल की घटनाओं को देखते हुए 2024 के कानून को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस हुई। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और यह संशोधन उसी दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने बताया कि परीक्षा सुधार के लिए गठित राधाकृष्ण समिति की 40 में से 35 सिफारिशें लागू की जा चुकी हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि 1992 और 2010 में भी परीक्षा सुधार की सिफारिशें हुई थीं, लेकिन तत्कालीन सरकारों ने उन पर अमल नहीं किया।

आठ घंटे होगी चर्चा

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, एनसीपी समेत सभी दलों से बातचीत के बाद संशोधन विधेयक पर चर्चा का समय बढ़ाकर आठ घंटे करने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो सरकार दो घंटे और चर्चा कराने के लिए भी तैयार है।

लोकसभा में विधेयक पर चर्चा जारी है और विभिन्न दल इसके पक्ष और विपक्ष में अपनी राय रख रहे हैं। सरकार का दावा है कि संशोधित कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाएगा, जबकि विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बदलने से नहीं, बल्कि व्यवस्था में व्यापक सुधार से ही पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।