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273 करोड़ खर्च करने के बाद मेट्रो प्रोजेक्ट बंद करने पर सियासत तेज, भड़कीं भाजपा सांसद, सीएम को पत्र लिख फैसले पर उठाए सवाल

ओडिशा सरकार द्वारा भुवनेश्वर मेट्रो परियोजना को बंद करने के फैसले पर विवाद गहरा गया है। भाजपा सांसद अपराजिता षडंगी और बीजद ने इस पर पुनर्विचार की मांग की है।

273 करोड़ खर्च करने के बाद मेट्रो प्रोजेक्ट बंद करने पर सिया

N4N Desk - ओडिशा की मोहन चरण माझी सरकार द्वारा भुवनेश्वर मेट्रो रेल परियोजना को बंद करने के फैसले ने राज्य में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। जहाँ एक ओर विपक्षी दल बीजद (BJD) इसे पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को श्रेय न मिलने देने की साजिश बता रहा है, वहीं अब सत्तारूढ़ भाजपा की अपनी सांसद अपराजिता षडंगी ने भी इस निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

भाजपा सांसद अपराजिता षडंगी ने जताई आपत्ति

भुवनेश्वर की भाजपा सांसद अपराजिता षडंगी ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को लिखे पत्र में कहा कि तेजी से बढ़ती आबादी और गंभीर ट्रैफिक समस्याओं को देखते हुए मेट्रो समय की मांग है। उन्होंने तर्क दिया कि यह परियोजना न केवल भुवनेश्वर, बल्कि कटक, जटणी और खुर्दा के बीच यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए अनिवार्य थी। सांसद ने जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया है।

बीजद का केंद्र से हस्तक्षेप का आग्रह

विपक्षी दल बीजद ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए इसे ओडिशा के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक बड़ा झटका बताया है। बीजद के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि राज्य को वित्तीय समस्या है, तो इसे केंद्र के साथ 50:50 की हिस्सेदारी के आधार पर चलाया जाना चाहिए।

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करोड़ों का खर्च और भविष्य की लागत का डर

परियोजना के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक इस पर 273.51 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सांसद अपराजिता षडंगी ने चेतावनी दी है कि इसे बीच में बंद करना भारी आर्थिक नुकसान है। यदि भविष्य में इसे फिर से शुरू किया जाता है, तो इसकी लागत 2 से 4 गुना तक बढ़ सकती है। बीजद नेताओं ने भी आरोप लगाया कि 6,255 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट ग्लोबल टेंडर के माध्यम से शुरू हुआ था और इसे बंद करना विकास विरोधी कदम है।

सरकार का पक्ष: आर्थिक कॉरिडोर को प्राथमिकता

राज्य कैबिनेट ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि अंतर-मंत्रालयी समिति (IMC) की सिफारिशों के आधार पर प्रोजेक्ट को बंद किया गया है। सरकार का तर्क है कि मेट्रो से अपेक्षित यात्रियों की संख्या नहीं मिलेगी और इससे सालाना करीब 2,000 करोड़ रुपये का घाटा होने की आशंका थी। कैबिनेट ने अब भुवनेश्वर-कटक-पुरी-पारादीप इकोनॉमिक कॉरिडोर को प्राथमिकता दी है, जिसके लिए एशियाई विकास बैंक (ADB) से तकनीकी सहायता ली जा रही है।

दिल्ली मेट्रो (DMRC) के साथ करार रद्द

सरकार के इस फैसले के साथ ही दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के साथ किया गया समझौता भी रद्द कर दिया गया है। पहले चरण में मेट्रो को भुवनेश्वर एयरपोर्ट से त्रिशूलिया तक 26 किमी लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर पर चलाया जाना था। बीजद नेताओं ने इसे 'ओडिशा के गौरव' से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि 18 अन्य राज्यों में मेट्रो सफल है, तो ओडिशा में इसे घाटे का बहाना बनाकर बंद करना अनुचित है।

पर्यटन और कनेक्टिविटी पर पड़ेगा असर

सांसद षडंगी के अनुसार, लिंगराज मंदिर, धौली और नंदनकानन जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों को जोड़ने के लिए मेट्रो एक पर्यावरण अनुकूल विकल्प था। इस परियोजना के बंद होने से न केवल आम जनता की आवाजाही प्रभावित होगी, बल्कि कटक-भुवनेश्वर कॉरिडोर की आर्थिक रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे अपनी ही सांसद और विपक्ष के भारी दबाव के बीच फैसले पर पुनर्विचार करेंगे।