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ED Success Rate: ED के आंकड़ों पर बड़ा सवाल, 93 फीसदी सफलता दावा बनाम 0.68फीसदी वास्तविकता,मनी लॉन्ड्रिंग जांच, छापेमारी और कुर्की के बीच उलझी पूरी तस्वीर, जान लीजिए

ED Success Rate: देश की प्रमुख जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय एक बार फिर अपने कामकाज और आंकड़ों को लेकर चर्चा के केंद्र में है।...

ED Stats Under Scrutiny 2892 Raids Low Conviction Rate Spark
ED के आंकड़ों पर बड़ा सवाल- फोटो : social Media

ED Success Rate:  देश की प्रमुख जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय एक बार फिर अपने कामकाज और आंकड़ों को लेकर चर्चा के केंद्र में है। एजेंसी जहां मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में 93% सफलता दर का दावा करती है, वहीं विस्तृत विश्लेषण एक अलग और जटिल तस्वीर पेश करता है।ED के मुताबिक यह 93 फीसदी सफलता दर पिछले 20 वर्षों के केवल उन 60 मामलों पर आधारित है, जिनका ट्रायल पूरा हो चुका है। इनमें 56 मामलों में 124 लोगों को दोषी ठहराया गया, जबकि 4 मामलों में आरोपी बरी हुए। लेकिन यदि कुल दर्ज मामलों को आधार बनाया जाए, तो वास्तविक सफलता दर मात्र 0.68 फीसदी के आसपास रह जाती है, क्योंकि करीब 99 फीसदी मामलों में अभी अंतिम फैसला आना बाकी है।

रिकॉर्ड छापेमारी और बढ़ती जांच

वित्तीय वर्ष 2025-26 में ED ने अब तक के इतिहास में सबसे अधिक 2,892 छापे मारे, जो पिछले वर्ष 1,491 के मुकाबले लगभग दोगुने हैं। यह दर्शाता है कि एजेंसी की जांच गतिविधियां काफी तेज हुई हैं। साथ ही केस दर्ज करने की संख्या भी लगातार बढ़ी है 2025-26 में 1,080 मामले दर्ज हुए, जो पिछले वर्षों की तुलना में 39 फीसदी अधिक है।

संपत्ति अटैचमेंट में भारी उछाल

मनी लॉन्ड्रिंग के तहत संपत्ति जब्ती में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार 712 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी कर लगभग 81,422 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। यह पिछले वर्ष के मुकाबले 171 फीसदी अधिक है।हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के बाद इनमें से एक बड़ा हिस्सा ही स्थायी कुर्की तक पहुंच पाता है। आंकड़ों के अनुसार कुल मामलों में केवल लगभग 28% ही अंतिम रूप से पुष्टि तक पहुंचते हैं।

गिरफ्तारी में गिरावट, पर जांच तेज

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ED द्वारा गिरफ्तारियों में लगभग 27% की कमी आई है। 2025-26 में 156 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि पिछले वर्षों में यह संख्या अधिक थी। एजेंसी का कहना है कि अब फोकस टारगेटेड और सबूत आधारित जांच पर है।

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संपत्ति वापसी और पीड़ितों को राहत

इस रिपोर्ट की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह भी बताई गई है कि एजेंसी ने 32,678 करोड़ रुपये की संपत्ति पीड़ितों, निवेशकों और बैंकों को लौटाई है। इसमें PACL पोंजी स्कैम केस का बड़ा योगदान रहा, जिसमें अकेले 15,582 करोड़ रुपये वापस किए गए।

केस निपटान और लंबित जांच

2019 के बाद मामलों के निपटारे में तेजी आई है, लेकिन बड़ी संख्या में केस अब भी लंबित हैं। 2025-26 में 685 मामलों को बंद किया गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ा

मनी लॉन्ड्रिंग जांच में विदेशों से सहयोग भी बढ़ा है। भारत को 246 अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहायता अनुरोध मिले, जिनमें सबसे ज्यादा यूके, यूएई, सिंगापुर और अमेरिका से जुड़े मामले शामिल हैं।

पूरी तस्वीर क्या कहती है?

आंकड़े साफ दिखाते हैं कि ED की कार्रवाई का दायरा और तीव्रता पिछले वर्षों में काफी बढ़ी है छापेमारी, केस दर्ज और संपत्ति अटैचमेंट में रिकॉर्ड उछाल हुआ है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ, अंतिम दोषसिद्धि और मामलों के निष्कर्ष तक पहुंचने की दर अपेक्षाकृत कम बनी हुई है। इसलिए बहस अब सिर्फ कार्रवाई की संख्या पर नहीं, बल्कि उसके अंतिम न्यायिक परिणामों की प्रभावशीलता पर भी केंद्रित हो गई है।