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NEET पेपर लीक पर सियासी डैमेज कंट्रोल? धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा रणनीति या मजबूरी, मोदी सरकार ने कैसे साधा छात्र आंदोलन का संकट, पढ़िए पीएम की GEN G आंदोलन पर क्या थी रणनीति

GEN G Student Movement: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा...सवाल उठ रहा है कि क्या यह इस्तीफा सिर्फ जवाबदेही तय करने की कार्रवाई थी या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा?

Dharmendra Pradhan Resigns Amid NEET Row Govt Faces Question
मोदी सरकार ने ऐसे साधा छात्र आंदोलन का संकट- फोटो : social Media

GEN G Student Movement: NEET पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में बड़ा घटनाक्रम बनकर सामने आया है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह इस्तीफा सिर्फ जवाबदेही तय करने की कार्रवाई थी या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा? आंदोलन की शुरुआत से ही छात्र संगठन और अभ्यर्थी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। ऐसे में सरकार के इस फैसले ने कई राजनीतिक संकेत दिए हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अपने कड़े और अडिग फैसलों के लिए जानी जाती रही है, लेकिन NEET पेपर लीक मामले में बढ़ते छात्र आक्रोश, विपक्ष के हमले और परीक्षा व्यवस्था पर उठते गंभीर सवालों ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार ने समय रहते संकट को संभालने और छात्रों के गुस्से को शांत करने के लिए जवाबदेही तय करने का रास्ता चुना।

सरकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की चिंता सिर्फ राजनीतिक नुकसान तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह भी थी कि छात्रों के आंदोलन को कोई बाहरी या राजनीतिक ताकत अपने हित में इस्तेमाल न कर सके। सरकार का आकलन था कि यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो लाखों छात्रों की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित हो सकता है। सूत्रों का दावा है कि केंद्र ने राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं को गंभीर विफलता के रूप में लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना था कि प्रभावित छात्रों की चिंताएं जायज हैं और परीक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। इसी सोच के तहत धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किया गया।

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के बाद भावुक संदेश जारी करते हुए कहा कि हाल के घटनाक्रमों से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह मामला व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने का है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी असामाजिक या देश विरोधी तत्व को छात्रों की परेशानी का फायदा नहीं उठाने दिया जाना चाहिए।

एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार शुरू से इस बात को लेकर सतर्क थी कि छात्र आंदोलन किसी बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप न ले ले। सरकारी अधिकारियों का मानना था कि छात्रों की मुख्य मांग स्वीकार कर उन्हें लंबे आंदोलन से बाहर निकालना जरूरी था, ताकि वे दोबारा अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दे सकें।दरअसल, पेपर लीक का मुद्दा सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। यह युवाओं के भरोसे, मेहनत और भविष्य से जुड़ा सवाल बन गया था। लाखों छात्र वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, ऐसे में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की खबर उनके लिए सबसे बड़ा झटका होती है।

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार का अगला फोकस परीक्षा प्रणाली में सुधार पर है। सरकार की योजना राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को धीरे-धीरे कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) प्रणाली की ओर ले जाने की है, ताकि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं की संभावना कम हो सके।इसके साथ ही राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और परीक्षा सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने की तैयारी है।

हालांकि बड़ा सवाल अभी भी कायम है क्या सिर्फ एक मंत्री का इस्तीफा पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान है? या फिर जरूरत है उस पूरे नेटवर्क को खत्म करने की, जो परीक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने का काम करता है?क्योंकि देश के करोड़ों युवाओं के लिए परीक्षा सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके सपनों, मेहनत और भविष्य की कुंजी होती है। व्यवस्था में भरोसा वापस लाना ही सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।