LATEST NEWS

  •  Bihar Teacher Recruitment 2026
  • बिहार शिक्षक भर्ती में 33,320 पद! आवेदन से पहले डोमिसाइल और पात्रता के नियम जान लें

  • Weather Forecast
  • Weather Forecast: दिल्ली-UP-बिहार समेत 23 राज्यों में बारिश की चेतावनी, IMD ने जारी किया अलर्ट

  • Bihar MLC Election 2026
  • बिहार MLC चुनाव: महिला मतदाताओं की संख्या उड़ा देंगे होश, तिरहुत में सबसे ज्यादा 'थर्ड जेंडर', जानिए

  • Elon Musk Mukesh Ambani
  • Elon Musk Mukesh Ambani: आप ही भारत के असली बॉस हैं’, एलन मस्क ने मुकेश अंबानी पर फिर

  • Today Panchang
  • Today Panchang: : सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों का तर्पण आज, जानें तिथि, नक्षत्र और पूजा का शुभ समय

IAS News: मौत को दी मात, कैंसर को हराया और अब बने IAS! जानिए कैसे संजय ने तीसरे प्रयास में UPSC क्रैक कर गाड़ दिए झंडे, मिली ये रैंक

IAS News: यह कहानी सिर्फ एक प्रतियोगी परीक्षा पास करने की नहीं है, बल्कि यह कहानी है अस्पताल के बेड से लाल बत्ती वाली गाड़ी तक के उस सफर की, जिसे मुमकिन करना किसी चमत्कार से कम नहीं था।

यूपीएससी
UPSC में मिली 946वीं रैंक- फोटो : social media

IAS News: एक साधारण सी परेशानियाँ जहां लोगों के सपनों को तोड़ देती हैं, वहीं संजय दहरिया की कहानी हमें सिखाती है कि अगर इरादे फौलादी हों तो मौत भी आपका रास्ता नहीं रोक सकती। यह कहानी सिर्फ एक प्रतियोगी परीक्षा पास करने की नहीं है, बल्कि यह कहानी है अस्पताल के बेड से लाल बत्ती वाली गाड़ी तक के उस सफर की, जिसे मुमकिन करना किसी चमत्कार से कम नहीं था। एक तरफ 6 साल तक कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का साया और दूसरी तरफ करियर का डूबता जहाज, जहाँ एक के बाद एक तीन नौकरियाँ हाथ से निकल गईं। समाज के ताने और शरीर की कमजोरी के बीच संजय के पास हार मान लेने के सौ बहाने थे, लेकिन उन्होंने चुना 'लड़ना'। आज जब UPSC 2025 के परिणामों में 946वीं रैंक के साथ उनका नाम चमक रहा है, तो यह जीत सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है जो अपनी परिस्थितियों से हार मान चुका है।

संजय ने UPSC में गाड़े झंडे 

दरअसल, यह प्रेरणादायक कहानी छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के रहने वाले संजय दहरिया का है। संजय ने संघर्ष, धैर्य और मेहनत की मिसाल पेश करते हुए यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल की है। छह साल तक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने और तीन नौकरियां छोड़ने के बाद उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की। बेलटुकरी गांव के 38 वर्षीय किसान पुत्र की इस उपलब्धि से उनके परिवार और पूरे इलाके में खुशी और गर्व का माहौल है।

Diarch GO

तीन नौकरियां छोड़ी 

संजय दहरिया की पढ़ाई एक स्थानीय सरकारी स्कूल से शुरू हुई थी। उनकी शैक्षणिक यात्रा में बड़ा मोड़ तब आया, जब कक्षा 5 में उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय माना (रायपुर) में हुआ। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया, लेकिन यह सफर आसान नहीं रहा। दहरिया ने वर्ष 2009 से 2011 तक पश्चिम बंगाल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की। हालांकि, बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने नौकरी छोड़ दी। 

6 साल तक चला कैंसर का इलाज 

इसी दौरान वर्ष 2012 में उन्हें लार ग्रंथियों के कैंसर का पता चला, जिसके बाद करीब छह साल तक उनका इलाज चलता रहा। बीमारी और दृष्टि संबंधी परेशानी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे। इलाज के दौरान और बाद में उन्होंने रायपुर के एक बैंक और महासमुंद डाकघर में भी काम किया। इसके साथ ही उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी जारी रखी। वर्ष 2022 से उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में प्रयास करना शुरू किया और अंततः तीसरे प्रयास में 2025 में सफलता हासिल कर ली।

NSIT
Nsmch

पूरी निष्ठा से करेंगे काम 

संजय दहरिया ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और मार्गदर्शकों के समर्थन को दिया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सिविल सेवाओं के माध्यम से देश की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि चाहे उन्हें आईएएस कैडर मिले या कोई अन्य सेवा, वे पूरी निष्ठा से लोक सेवा के लिए काम करेंगे। महासमुंद के कलेक्टर विनय कुमार लांगेह और जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने भी संजय दहरिया को उनकी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और इसे साहस, संघर्ष और दृढ़ संकल्प का प्रेरक उदाहरण बताया।