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तिब्बत में फिर फटी झील, नेपाल में हाई अलर्ट; चीन ने रोका रेस्क्यू ऑपरेशन, भारत में 7 शव बरामद

चीन ने भी नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बनी इस झील को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। हालिया भीषण भूस्खलन के बाद नदियों के रास्ते में मलबा जमा होने से यह बैरियर लेक बनी है। यहाँ करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा था जो 30 लाख क्यूबिक हो सकता है.

Tibet Lake Bursts
Tibet Lake Bursts- फोटो : news4nation

Tibet Lake Bursts : तिब्बत-नेपाल सीमा क्षेत्र में बाढ़ की तबाही के बीच एक बार फिर बड़ी चिंता सामने आई है। तिब्बत की ओर भूस्खलन से बनी एक झील के दोबारा फटने और लगातार ओवरफ्लो होने की सूचना के बाद नेपाल में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। नेपाल पुलिस ने सुरक्षा बलों, राहत और बचाव दलों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी सतर्क रहने और निचले इलाकों से निकलकर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। नेपाल के रसुवा इलाके में हेलीकॉप्टर से चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को भी फिलहाल रोक दिया गया है, जिसके बाद स्थानीय लोग जान बचाने के लिए ऊंचे इलाकों की ओर भाग रहे हैं।

चीन ने भी नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बनी इस झील को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। चीन के अनुसार, हालिया भीषण भूस्खलन के बाद नदियों के रास्ते में मलबा जमा होने से यह बैरियर लेक बनी है। इसमें पहले करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा था, जबकि शुक्रवार सुबह तक पानी की मात्रा करीब 25 लाख क्यूबिक मीटर पहुंच गई। अधिकारियों का अनुमान है कि गुरुवार से सप्ताहांत तक करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी झील में पहुंच सकता है। ऐसे में झील के बांध के टूटने का खतरा काफी बढ़ गया है।

चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक झील से पानी लगातार ओवरफ्लो हो रहा है। इससे नीचे की ओर दोबारा अचानक बाढ़ और मलबे के तेज बहाव का खतरा पैदा हो गया है। चीन ने झील के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर नजर रखने के लिए इंजीनियरिंग और निगरानी टीमों को तैनात किया है। हालांकि, बाढ़ के कारण अधिकांश चीनी आपातकालीन दल ग्यिरोंग पोर्ट से करीब 7 किलोमीटर दूर एक गांव में फंस गए हैं। ग्यिरोंग पोर्ट नेपाल और चीन के बीच प्रमुख जमीनी सीमा मार्ग है, जो बुधवार की विनाशकारी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। हालात को देखते हुए चीन ने इलाके में चल रहा बचाव अभियान रोक दिया है।

दरअसल, बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक पहाड़ के ग्लेशियर के नदी में गिरने और बड़े पैमाने पर मलबा आने के कारण अचानक बाढ़ की स्थिति बनी। इसके बाद नेपाल के रसुवा समेत कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ।

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इस आपदा का असर अब भारत तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश में नेपाल से बहकर आई नदियों से सात शव बरामद किए गए हैं। गुरुवार को महाराजगंज जिले से चार अज्ञात शव मिले, जबकि पड़ोसी कुशीनगर जिले में तीन और शव बरामद किए गए। कुशीनगर नेपाल सीमा से करीब 70 किलोमीटर नीचे की ओर स्थित है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि ये सभी शव नेपाल में आई भीषण बाढ़ के पानी में बहकर भारत पहुंचे हैं। फिलहाल मृतकों की पहचान की जा रही है।

इस बीच चीन के दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत में शुक्रवार को 5.1 तीव्रता का भूकंप भी आया। चीन के भूकंप नेटवर्क केंद्र के मुताबिक लोंगचांग शहर में दोपहर 1:13 बजे भूकंप आया, जिसका केंद्र जमीन से करीब 13 किलोमीटर नीचे था। नेपाल में भी बाढ़ की तबाही के बीच गुरुवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। लगातार बाढ़, भूस्खलन और भूकंप की घटनाओं ने चीन, तिब्बत और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में चिंता और बढ़ा दी है।