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इजरायली खुफिया एजेंसी का ऑपरेशन प्रेसिडेंट, तेहरान के तख्त तक बिछी थी मोसाद की सुरंग? जब ईरान का सबसे कट्टर दुश्मन ही बन गया इजरायल का मोहरा, सनसनीखेज दावे से आया है भूचाल

Mossad Operation Tehran: अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक सनसनीखेज खोजी रिपोर्ट ने दावा किया है कि ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद जो कभी इजरायल को नेस्तनाबूद करने की कसमें खाते थे वही मोसाद के एजेंट-ए-खास बन चुके थे

Mossad Operation Tehran Ex President Ahmadinejad Faces Shock
मोसाद का ऑपरेशन तेहरान!- फोटो : social Media

Mossad Operation Tehran:  क्या कोई खुफिया एजेंसी इतनी दुस्साहसी हो सकती है कि दुश्मन देश के सबसे बड़े पद पर बैठे व्यक्ति को ही अपना सरकारी कारिंदा बना ले? पेजर और वायरलेस सेट में बम-ए-खामोश छिपाकर महीनों बाद उड़ाने वाली इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने इस बार गेम को एक ऐसे खौफनाक और अकल्पनीय मुकाम पर पहुंचा दिया है, जिसने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक सनसनीखेज खोजी रिपोर्ट ने दावा किया है कि ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद जो कभी इजरायल को नेस्तनाबूद करने की कसमें खाते थे वही मोसाद के एजेंट-ए-खास बन चुके थे। यह कहानी किसी जासूसी थ्रिलर से भी ज्यादा पेचीदा और रोंगटे खड़े कर देने वाली है।

तख्तापलट का सीक्रेट प्लान

मोसाद का मकसद सिर्फ सीक्रेट इनफॉर्मेशन हासिल करना नहीं था, क्योंकि इतनी बड़ी मछली के लिए मोसाद इतना बड़ा जोखिम नहीं उठाती। इजरायल का असली मंसूबा था ईरान की मौजूदा इस्लामिक हुकूमत को गिराकर महमूद अहमदीनेजाद को दोबारा तेहरान के तख्त पर बैठाना। साल 2022 के आसपास जब मोसाद को भनक लगी कि अहमदीनेजाद मौजूदा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई से बेहद नाराज हैं और सत्ता में वापसी के लिए तड़प रहे हैं, तो इजरायली हुक्मरानों ने जाल बुनना शुरू किया। इजरायल का मानना था कि अहमदीनेजाद की पकड़ आज भी ईरान के गरीब और कामकाजी तबके के बीच बेहद मजबूत है।

बुदापेस्ट का दिखावा और मोसाद चीफ से सीक्रेट मुलाकात

अहमदीनेजाद और इजरायली खुफिया अधिकारियों के बीच बातचीत के लिए हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट को मुफीद जगह चुना गया। साल 2024 की शुरुआत में बुडापेस्ट की लुडोविका यूनिवर्सिटी में क्लाइमेट चेंज पर एक फर्जी सेमिनार आयोजित कराया गया, जिसमें अहमदीनेजाद को न्योता दिया गया। यरूशलम पोस्ट के मुताबिक, मोसाद के तत्कालीन चीफ डेविड बर्निया खुद अहमदीनेजाद से खुफिया मुलाकात करने बुडापेस्ट पहुंचे।इस डील के बाद अहमदीनेजाद ने अपनी पुरानी कट्टर छवि को बदलना शुरू किया, अंग्रेजी सीखी, पहनावा बदला और पब्लिक इमेज को लिबरल दिखाने की कोशिश की।

इस पूरी साजिश के एवज में अहमदीनेजाद के बेहद करीबी प्रवक्ता इलाय अली अकबर जवनफेकर को इजरायल की तरफ से मोटी रकम  दी गई, और पूर्व राष्ट्रपति की तमाम विदेश यात्राओं का खर्च मोसाद ने उठाया। इस पूरे प्लान की पल-पल की जानकारी अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को भी दी जा रही थी।

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फरवरी 2026: एक हमला, सीक्रेट रेस्क्यू और मिशन फेल

इस पूरी दास्तान का सबसे ड्रामेटिक मोड़ फरवरी 2026 में आया। अहमदीनेजाद के घर के अहाते पर एक इजरायली हवाई हमला हुआ, जिसमें उनकी बख्तरबंद गाड़ियों को निशाना बनाया गया। मोसाद के जासूसों ने तुरंत अहमदीनेजाद को वहां से निकाला और तेहरान की एक गुप्त जगह पर शिफ्ट कर दिया। लेकिन युद्ध की इस विभीषिका से अहमदीनेजाद बिदक गए और उस सीक्रेट लोकेशन से बाहर निकल आए।

अंजाम, अदालत और नजरबंदी

आखिरकार, इस खूनी खेल की भनक ईरान की सबसे खूंखार विंग आईआरजीसी  की इंटेलिजेंस ब्रांच को लग गई। चार सीनियर ईरानी अफसरों के हवाले से अखबार ने दावा किया है कि अहमदीनेजाद के अपने सलाहकारों से विदेशी मदद के जरिए तख्तापलट करने की बातें लीक हो चुकी थीं। नतीजा यह हुआ कि कभी ईरान के सबसे रसूखदार रहे इस पूर्व  राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर किसी अज्ञात जगह पर नजरबंद कर दिया गया है।

हालांकि, अहमदीनेजाद के दफ्तर और पैलेस्टाइन क्रॉनिकल ने इन तमाम दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे इजरायल का एक मनगढ़ंत और प्रोपेगैंडा का पुलिंदा करार दिया है। सच चाहे जो हो, लेकिन मोसाद के इस कथित ऑपरेशन प्रेसिडेंट ने तेहरान से लेकर वाशिंगटन तक भूचाल ला दिया है।