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उत्तराखंड में सूखे का संकट: जून में 35% कम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता, पर्वतीय जिलों से राहत की खबर

उत्तराखंड में इस साल जून के महीने में कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के कारण मानसून से पहले का सूखा किसानों के लिए बड़ी आफत बन गया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, राज्य के 13 में से 12 जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है....

उत्तराखंड में सूखे का संकट: जून में 35% कम बारिश ने बढ़ाई कि
उत्तराखंड में सूखे संकट के बीच राहत की खबर - फोटो : न्यूज4नेशन

Dehradun : उत्तराखंड में इस साल जून के महीने में कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के कारण प्री-मानसून की बारिश न के बराबर हुई है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 13 में से 12 जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे पूरे प्रदेश में बारिश का आंकड़ा सामान्य (115.6 मिमी) के मुकाबले महज 74.9 मिमी रहा, जो कि 35% की भारी कमी को दर्शाता है। हालांकि, मौसम विभाग ने राहत की खबर देते हुए उम्मीद जताई है कि 29 और 30 जून तक प्रदेश में मानसून दस्तक दे देगा, जिससे स्थिति में सुधार हो सकता है।

मैदानी इलाकों में बढ़ा तापमान, हरिद्वार और उधमसिंह नगर में सूखा

राज्य में केवल टिहरी ही एकमात्र ऐसा जिला रहा जहां सामान्य से अधिक बादल बरसे, जबकि बाकी सभी जिले पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। सबसे बदतर हालात मैदानी कृषि प्रधान क्षेत्रों के हैं, जहां हरिद्वार में सामान्य से 74% और ऊधमसिंह नगर में 72% कम बारिश दर्ज की गई है। इस सूखे और तेज उमस के कारण मैदानी इलाकों का तापमान सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर चला गया है, जिससे खरीफ फसलों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।

धान और गन्ने की रोपाई प्रभावित, बढ़ी खेती की लागत

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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह समय धान और गन्ने की फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इन्हें सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है। बारिश न होने के कारण हरिद्वार में फसलों के उत्पादन में 20% तक गिरावट की आशंका है। वहीं, ऊधमसिंह नगर के काशीपुर, रुद्रपुर और सितारगंज जैसे क्षेत्रों में किसान महंगे डीजल फूंककर ट्यूबवेल के भरोसे धान की रोपाई करने को मजबूर हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।

पहाड़ी क्षेत्रों में नगदी फसलों और फलों के उत्पादन को झटका

पहाड़ी इलाकों और जौनसार-बावर क्षेत्र में बारिश न होने से मक्का की बुवाई समय पर नहीं हो सकी है, और प्रमुख नगदी फसल हरा धनिया सूखने की कगार पर है। नैनीताल के रामगढ़ और धारी जैसे फल उत्पादक बेल्ट में सेब, पुलम, खुमानी और नाशपाती के उत्पादन में 50% तक की भारी गिरावट की आशंका है, जबकि सेब का आकार भी छोटा रह गया है। दूसरी ओर, अल्मोड़ा में पहले हुई ओलावृष्टि ने बागवानी को चोट पहुंचाई है, जहाँ पिछले तीन वर्षों में फल उत्पादन पहले ही 2,092 मीट्रिक टन घट चुका है।

कृषि विशेषज्ञों की सलाह और पर्वतीय जिलों से राहत की खबर

इस संकट के बीच बागेश्वर, चमोली और चम्पावत जिलों से राहत भरी खबर है, जहाँ समय पर हुई अच्छी बारिश के कारण धान और मड़ुवा की बुवाई सामान्य रूप से चल रही है। देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर और कृषि विशेषज्ञ राजा राम ने किसानों को सतर्क करते हुए सलाह दी है कि वे पर्याप्त वर्षा होने के बाद ही धान की रोपाई का काम करें। यदि जून के अंतिम सप्ताह में मानसून की अच्छी बारिश नहीं होती है, तो इस साल खरीफ सीजन की उत्पादकता बुरी तरह प्रभावित होगी।