LATEST NEWS

  • रामनगर राज दरबार से निकली ऐतिहासिक माता की डोली यात्रा, हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गूंजे माता के जयकारे
  • रामनगर राज दरबार से निकली ऐतिहासिक माता की डोली यात्रा, हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गूंजे माता के

  • Bihar News : कैमूर में उत्पाद विभाग की टीम ने ट्रक पर लोड 90 लाख की शराब किया जब्त, मौके से चालक को किया गिरफ्तार
  • Bihar News : कैमूर में उत्पाद विभाग की टीम ने ट्रक पर लोड 90 लाख की शराब किया

  • Bhagwan Singh Kushwaha Controversy
  • 'बिहार में हत्या होते रहती है, क्या कीजिएगा', मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा के बिगड़े बोल...

  • कोयला तस्कर लाला के खिलाफ ED की बड़ी कार्रवाई : 136.44 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच, कुल जब्ती 815 करोड़ के पार
  • कोयला तस्कर लाला के खिलाफ ED की बड़ी कार्रवाई : 136.44 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच, कुल जब्ती

  • Bihar Durga Puja: नालंदा में पट खुलते ही उमड़ा आस्था का सैलाब, मां दुर्गा के दर्शन को टूट पड़े श्रद्धालु, रंगीन रोशनी से जगमगाया शहर
  • Bihar Durga Puja: नालंदा में पट खुलते ही उमड़ा आस्था का सैलाब, मां दुर्गा के दर्शन को टूट

काशी में 'काल' का नया चक्र:30 मुहूर्त और 24 नहीं 30 घंटे का दिन,अद्भुत है इसका गणित

काशी विश्वनाथ धाम में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है. यह घड़ी सूर्योदय के आधार पर 30 मुहूर्तों में समय की गणना करती है और ग्रहों, नक्षत्रों व पंचांग की सटीक जानकारी देती है. इसके साथ ही एक हाई-टेक ऐप भी लॉन्च किया गया है जो 5800 साल के कैल

This magical clock in Kashi
काशी में 'काल' का नया चक्र- फोटो : Social Media

धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी अब सनातन विज्ञान के एक नए अध्याय की साक्षी बन रही है। उज्जैन के बाद, बाबा विश्वनाथ के धाम में विश्व की दूसरी 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' स्थापित कर दी गई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट की गई यह घड़ी रविवार को ब्रह्म मुहूर्त से क्रियाशील हो गई है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मंदिर चौक में लगी यह घड़ी न केवल समय बताती है, बल्कि भारतीय कालगणना की वैज्ञानिकता को भी जीवंत करती है।

30 मुहूर्त और 24 नहीं 30 घंटे का दिन: अद्भुत है इसका गणित

Diarch GO

इस वैदिक घड़ी का गणित आधुनिक घड़ियों से बिल्कुल अलग और प्राचीन शास्त्रीय पद्धति पर आधारित है। यहाँ एक दिन को 24 घंटों के बजाय 30 मुहूर्तों में बांटा गया है, जहाँ एक मुहूर्त की अवधि लगभग 48 मिनट होती है। समय की सूक्ष्म गणना के लिए इसे 'कला' (96 सेकंड) और 'काष्ठा' (3.2 सेकंड) में विभाजित किया गया है। यह घड़ी पूरी तरह से सूर्योदय पर आधारित है और जिस स्थान पर यह लगी होती है, वहां के सूर्योदय के अनुसार खुद को स्वचालित रूप से समायोजित कर लेती है।

पंचांग से लेकर शुभ-अशुभ मुहूर्त तक: एक संपूर्ण डेटाबेस

NSIT
Nsmch

यह केवल समय देखने का यंत्र नहीं, बल्कि सनातन विज्ञान का एक डिजिटल विश्वकोश है। मंदिर के सीईओ विश्व भूषण मिश्र के अनुसार, इस घड़ी के माध्यम से भारतीय स्टैंडर्ड टाइम (IST) के साथ-साथ विक्रम संवत, मास, ग्रहों की स्थिति, चंद्रमा की चाल, भद्रा की स्थिति और विशेष रूप से शुभ-अशुभ मुहूर्त की सटीक जानकारी मिलेगी। यह घड़ी पंचांग के पांचों अंगों (तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण) की रीयल-टाइम अपडेट प्रदान करती है।

हाई-टेक ऐप और 5800 साल का कैलेंडर: तकनीक और परंपरा का मेल

प्राचीन ज्ञान को आधुनिक पीढ़ी से जोड़ने के लिए 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप' भी लॉन्च किया गया है। यह ऐप 180 से अधिक भाषाओं को सपोर्ट करता है और इसमें पिछले व अगले 5800 वर्षों का पंचांग समाहित है। यह किसी आधुनिक स्मार्टवॉच की तरह तापमान, हवा की गति और आर्द्रता की जानकारी देने के साथ-साथ शुभ समय के लिए अलार्म के जरिए संकेत भी देता है। बीएचयू के विद्वानों के अनुसार, यह घड़ी युवाओं को भारत के गौरवशाली वैज्ञानिक अतीत और सटीक समय चक्र से परिचित कराने में मील का पत्थर साबित होगी।