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श्रीलंका सेना और लिट्टे के बीच युद्ध में चले तोप के गोले और कारतूस-खोखे के अवशेष से बना शांति स्तूप बोधगया में है स्थापित, विश्व को देता है शांति का संदेश

श्रीलंका सेना और लिट्टे के बीच युद्ध में चले तोप के गोले और

GAYA :  बिहार के बोधगया में अनोखा शांति स्तूप स्थापित है. इस शांति स्तूप की खासियत है, कि इसे तोप के गोले, हथियारों के कारतूस और खोखे के अवशेष से इसका निर्माण हुआ है. पीतल की परत से ढंका यह स्तूप विश्व को शांति का संदेश दे रहा है. 33 सालों तक श्रीलंकाई सेना और लिट्टे के बीच गृृहयुद्ध चला था। उस युद्ध में तोप के गोले और जिन हथियारों के कारतूसों और खोखे के अवशेष मिले. उसी से यह शांति स्तूप तैयार किया गया था, जो आज भी विश्व को शांति का संदेश दे रहा है। श्रीलंका की सरकार ने इस तरह का दो शांति स्तूप बनाया था, जो एक श्रीलंका में है, तो दूसरा बोधगया श्रीलंकाई मठ में है।

बिहार के गया जिला अंतर्गत बोधगया में शांति स्तूप है. इस शांति स्तूप की खासियत यह है, कि यह असलहे के जखीरे से बना है. पीतल की परत से ढका यह अनोखा शांति स्तूप बोधगया के श्रीलंकाई मठ में स्थापित है और यहां से विश्व को शांति का संदेश देता है। बता दें कि 33 सालों तक श्रीलंकाई सेना और लिट्टे के बीच गृृहयुद्ध चला था, 2009 में युद्ध रूका था

2009 में युद्ध समाप्ति की घोषणा के बाद श्रीलंका सरकार ने सेना और लिट्टे के साथ चले युद्ध में तोप के गोले और हथियार के कारतूस-खोखे के अवशेषों को चुना और फिर विश्व भर में शांति का संदेश देने के मकसद से शांति स्तूप का निर्माण कराया. मकसद यह भी था कि श्रीलंका में इस तरह का फिर कोई युद्ध न हो और विश्व में भी ऐसी हिंसा या युद्ध की नौबत ना आए. इसी को लेकर श्रीलंका सरकार के द्वारा इस तरह का अनोखा दो स्तूप तैयार कराया गया था, जिसमें एक भारत को दिया गया.

दुनिया में सिर्फ दो जगहों पर बना है ऐसा शांति स्तूप

इस तरह का अनोखा शांति स्तूप विश्व में दो ही स्थान पर है, जिसमें एक बोधगया है और एक श्रीलंका में स्थित है. बोधगया में शांति स्तूप देने का बड़ा उद्देश्य रहा है कि बोधगया बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था का बड़ा केंद्र है और यहां पूरे विश्व से लोग भगवान बुद्ध के दर्शन करने आते हैं. यह अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है. ऐसे में विश्व के पटल पर इसकी महता को देखते हुए बोधगया में एक स्तूप महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया (श्रीलंकाई मठ) में स्थापित किया गया. बोधगया में ही भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और भगवान बुद्ध ने सत्य अहिंसा और शांति का उपदेश दिया था.

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तीन दशक के युद्ध में हजारों लोगों ने गंवाई थी, पीएम राजीव गांधी भी इनमें रहे शामिल

श्रीलंकाई सेना और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल (लिट्टे) के बीच 33 वर्षों तक गृृहयुद्ध चला था. इस गृृहयुद्ध में हजारों की जान गई थी, जिसमें सेना के अफसर, जवान के अलावे आम नागरिक, बच्चे महिलाएं आदि शामिल थे। वहीं माना जाता है कि इस युद्ध के कारण ही भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या हुई थी। 

इस युद्ध को देखकर श्रीलंका की सरकार ने 2009 में अपने देश और विश्व में शांति देने का अनूठा फैसला लिया. इसके बाद दो शांति स्तूप बनाए गए, जिसमें युद्ध में चले असलहे के जखीरा का उपयोग हुआ और फिर इस तरह का शांति स्तूप एक बोधगया में है तो दूसरा श्रीलंका में है. विश्व में ऐसा स्तूप सिर्फ श्रीलंका और बोधगया में ही स्थापित है. विश्व भर के बौद्ध श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बोधगया है. इसे देखते हुए श्रीलंका सरकार ने भारत सरकार को बोधगया में इस शांति स्तूप को स्थापित करने के लिए दान दिया था।

इस संबंध में श्रीलंका मठ के इंचार्ज बताते हैं कि विश्व में यह स्तूप शांति, अहिंसा का संदेश देता है. श्रीलंका की सेना और लिट्टे बीच 33 वर्षों तक युद्ध चला था. जब युद्ध रूका तो श्रीलंका की सरकार ने तोप के गोले, कारतूस और खोखे के अवशेषों से इस तरह के दो स्तूप बनाए, जिसमें एक श्रीलंका में है और एक बोधगया में स्थापित है. पूरे विश्व में दो ही ऐसे शांति स्तूप हैं, जिसके निर्माण में तोप के गोले और कारतूस -खोखा के अवशेष का इस्तेमाल हुआ है. यहां आकर लोग शांति का पैगाम लेकर जाते हैं