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Bihar Election 2025: मोकामा में अब ललन सिंह वर्सेस सूरजभान की दिलचस्प लड़ाई, अनंत सिंह के जेल जाते ही भूमिहारों के गढ़ में मचा घमासान, अब क्या करेंगे तेजस्वी?

Bihar Election 2025: दुलारचंद यादव की मौत और अनंत सिंह के जेल जाते ही मोकामा की राजनीति में ललन सिंह की एंट्री हो गई है। ललन सिंह ने मोकामा विधानसभा सीट की कमान अपने हाथ में ले ली है....

ललन सिंह, सूरजभान सिंह, अनंत सिंह
ललन सिंह वर्सेस सूरजभान सिंह की दिलचस्प लड़ाई - फोटो : social media

Bihar Election 2025: बिहार चुनाव के बीच मोकामा का राजनीति गरमा गई है। दुलारचंद यादव की मौत के बाद पटना पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। अनंत सिंह को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया है। अनंत सिंह के जेल जाते ही मोकामा में सियासी सरगर्मी सातवें आसमान पर पहुंच गया है। अनंत सिंह की गैरमौजूदगी में अब केंद्रीय मंत्री और मुंगेर सांसद ललन सिंह ने चुनावी कमान को संभाल लिया है। ललन सिंह आज मोकामा पहुंचे और उन्होंने ऐलान किया कि आज से मैंने यहां की कमान संभाल ली है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो मोकामा चुनाव में ललन सिंह की एंट्री तेजस्वी यादव और राजद के लिए 440 वोल्ट के झटके से कम नहीं है।

मोकामा में गरमाई सियासत 

राजनीतिक जानकारों की मानें तो ललन सिंह का यह ऐलान ही विपक्षियों के लिए कड़ा संदेश है। ललन सिंह आज मोकामा में रोड शो भी करेंगे। राजनीतिक जानकारों की मानें तो अब मोकामा में लड़ाई अनंत सिंह वर्सेस वीणा देवी की नहीं रही बल्कि अब लड़ाई ललन सिंह वर्सेस सूरजभान सिंह के बीच डाइवर्ट हो गई है। अनंत सिंह के जेल जाने के बाद माना जा रहा था कि मोकामा में अब जदयू की स्थिति कमजोर हो सकती है लेकिन ललन सिंह के कमान संभालते ही अनंत सिंह की स्थिति एक बार फिर मजबूत हो गई है।

ललन सिंह वर्सेस सूरजभान सिंह की दिलचस्प लड़ाई 

मोकामा में 2025 के विधानसभा चुनाव में भूमिहार वर्सेस भूमिहार और बाहुबली बनाम बाहुबली की लड़ाई है। भूमिहारों के बड़े नेता मानें जाने वाले अनंत सिंह और सूरजभान सिंह आमने सामने हैं। अनंत सिंह के खिलाफ सूरजभान सिंह की पत्नी दांवा ठोक रही है। दोनों बाहुबलियों के मैदान में होने से मोकामा हॉट सीट तो बनी ही हुई थी लेकिन अब दुलारचंद हत्याकांड, अनंत सिंह को जेल और ललन सिंह की एंट्री से मोकामा की लड़ाई अब और दिलचस्प हो गई है। मोकामा में मतदान 6 नवंबर को होना है। चुनाव प्रचार का सिलसिला कल शाम 5 बजे थम जाएगा। यानी आज और कल में ललन सिंह मोकामा में कैंप करेंगे और अनंत सिंह के पक्ष में समर्थकों को एक जुट करेंगे। 

ललन सिंह गरजे 

मोकामा पहुंचे ललन सिंह ने आज साफ लहजे में कहा कि मोकामा के एक एक व्यक्ति को चुनाव अनंत सिंह बनकर लड़ना है। उन्होंने कहा कि अनंत सिंह थे तो मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं थी लेकिन अब अनंत सिंह की गैरमौजूदी में मैंने कमान संभाल ली है। उन्होंने दावा कि अनंत सिंह की जीत होगी और बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनेंगे। ललन सिंह ने कहा कि अनंत सिंह को षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है। अनंत सिंह कानून का सम्मान करते हुए जेल चले गए लेकिन पुलिस जांच कर रही है और जल्द ही इस मामले में खुलासा होगा। कई वीडियो सामने आ रहे हैं जो इस षड्यंत्र का खुलासा कर रहे। ललन सिंह ने कहा कि जो जो दोषी हैं उनको बख्शा नहीं जाएगा। 

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14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में अनंत 

मालूम हो कि, 30 अक्टूबर को मोकामा के बसावन चक इलाके में अनंत सिंह और जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। दोनों काफिले आमने-सामने आ गए थे। शुरुआत में नारेबाजी और पथराव हुआ, फिर स्थिति बेकाबू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथापाई के दौरान गोली चली और अफरातफरी में 75 वर्षीय दुलारचंद यादव पर एक थार गाड़ी चढ़ा दी गई, जिससे उनकी मौके पर मौत हो गई। इसी घटना के बाद पुलिस ने अनंत सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या और आचार संहिता उल्लंघन के मामले दर्ज किए। इसी मामले में अनंत सिंह पर कार्रवाई की गई है कोर्ट ने अनंत सिंह को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।  

भूमिहारों के प्रभावशाली नेता है अनंत 

गौरतलब हो कि, बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरण बहुत महत्वपूर्ण हैं। कई राजनीतिक दल अक्सर भूमिहार मतदाताओं को संगठित करने के लिए अनंत सिंह जैसे प्रभावशाली नेताओं का उपयोग करते थे। अनंत सिंह की छवि एक स्थानीय संरक्षक (गॉडफादर या दादा) की रही है, जो अपने समर्थकों के लिए खड़े होते थे। इस छवि ने उन्हें अपने समुदाय के बीच लोकप्रियता हासिल करने में मदद की। अनंत सिंह की छवि एक 'दबंग' और 'बाहुबली' नेता की रही है, जिन्हें उनके समर्थक 'छोटे सरकार' के नाम से जानते हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस घटनाक्रम ने मोकामा की लड़ाई दिलचस्प तो बनाई है लेकिन रिजल्ट अनंत सिंह के पक्ष में कर गई है। तेजस्वी यादव के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा सकता है। अनंत सिंह जेल में रहते हुए निर्दलीय चुनाव भी जीत चुके हैं।