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सावन आज से शुरू, शिव भक्ति के साथ बन रहा दुर्लभ ग्रह संयोग, इन 5 राशियों की चमक सकती है किस्म, जानें क्या करें और क्या नहीं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। ऐसे में 30 जुलाई से सावन की शुरुआत होते ही कई जातकों के लिए यह महीना बेहद खास होने जा रहा है.

Sawan 2026 Begins
Sawan 2026 Begins - फोटो : news4nation

Sawan 2026:  भगवान शिव की आराधना को समर्पित सावन (श्रावण) मास की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है। हिंदू धर्म में सावन को सबसे पवित्र महीनों में गिना जाता है। मान्यता है कि इस पूरे महीने भगवान शिव और माता पार्वती अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इस बार सावन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद खास माना जा रहा है। देवगुरु बृहस्पति (गुरु), बुध और शनि की चाल में होने वाले बदलाव को कई ज्योतिषी महत्वपूर्ण ग्रह संयोग मान रहे हैं, जिसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा। हालांकि कुछ राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से शुभ रहने का अनुमान जताया जा रहा है।

सावन में क्यों खास है इस बार का संयोग?

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, सावन की शुरुआत के आसपास गुरु, बुध और शनि की स्थिति में बदलाव होने से कर्म, ज्ञान, शिक्षा, नौकरी, व्यापार और आर्थिक मामलों पर प्रभाव पड़ सकता है। गुरु को ज्ञान, भाग्य और समृद्धि का कारक माना जाता है, जबकि शनि कर्म और न्याय के ग्रह हैं। ऐसे में इन दोनों ग्रहों की अनुकूल स्थिति कई लोगों के जीवन में नए अवसर ला सकती है। हालांकि ज्योतिषीय फल व्यक्ति की जन्म कुंडली पर भी निर्भर करता है।

इन राशियों के लिए शुभ माना जा रहा समय

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस ग्रह संयोग का सकारात्मक प्रभाव विशेष रूप से वृषभ, मिथुन, सिंह, धनु और मीन राशि के जातकों पर पड़ सकता है। इन राशियों के लोगों को नौकरी और व्यवसाय में नए अवसर, आर्थिक लाभ, रुके हुए कार्यों में सफलता और मान-सम्मान मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं अन्य राशियों के लोगों को भी धैर्य, संयम और नियमित पूजा-पाठ करने की सलाह दी जा रही है।

सावन में पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम, तुलसी के पत्ते और केतकी का फूल अर्पित नहीं करना चाहिए। कटे-फटे या खंडित बेलपत्र चढ़ाने से बचें। दूध चढ़ाते समय तांबे के बर्तन का प्रयोग न करें। दूध स्टील, चांदी या पीतल के पात्र से अर्पित करना उचित माना जाता है, जबकि तांबे के पात्र से केवल जल चढ़ाया जाता है। सावन में सात्विक भोजन, संयम और भगवान शिव के मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।

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इन कामों से बचने की सलाह

धार्मिक परंपराओं के अनुसार सावन में अनावश्यक क्रोध, मांस-मदिरा का सेवन, जीव-जंतुओं को कष्ट पहुंचाना, विशेषकर नाग और सांड को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं माना जाता। कई परंपराओं में इस महीने बाल और नाखून कटवाने, दिन में अधिक सोने तथा तामसिक भोजन से परहेज की भी सलाह दी जाती है। हालांकि ये मान्यताएं विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

शिव भक्ति का संदेश

धार्मिक विद्वानों का कहना है कि सावन का वास्तविक संदेश केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि संयम, सेवा, करुणा और आत्मसंयम का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। श्रद्धा और सात्विक आचरण के साथ भगवान शिव की उपासना करने से मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। ऐसे में इस बार का सावन आस्था के साथ-साथ ग्रहों के विशेष संयोग के कारण भी श्रद्धालुओं और ज्योतिष में रुचि रखने वालों के लिए खास माना जा रहा है।