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दिल्ली हाई कोर्ट से राघव चड्ढा को झटका : कोर्ट ने कहा-यह झेलने की आपको आदत डालनी चाहिए, पढिए क्या है पूरा मामला

बीजेपी के राज्य़सभा सांसद राघव चड्डा को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रहे व्यंग्यात्मक पोस्ट और मीम्स को हटाने का आदेश देने से इनकार करते हुए बड़ी टिप्पणी की है.....

दिल्ली हाई कोर्ट से राघव चड्ढा को झटका : कोर्ट ने कहा-यह झेल
दिल्ली हाई कोर्ट से राघव चड्ढा को झटका- फोटो : न्यूज4नेशन

Delhi : दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को बुधवार (1 जुलाई) को एक बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रहे व्यंग्यात्मक पोस्ट और मीम्स को हटाने का आदेश देने से साफ इनकार कर दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन और राजनीति में रहने वाले नेताओं को व्यंग्यात्मक मजाक को अपने पेशे का एक जरूरी हिस्सा मानना चाहिए और इसे झेलने की आदत डालनी चाहिए।


52 में से सिर्फ 5 अश्लील दस्तावेजों को हटाने का आदेश

राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने वाले AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड विजुअल्स, सिंथेटिक वॉयस क्लोनिंग और भ्रामक डिजिटल कंटेंट के खिलाफ पर्सनैलिटी राइट्स (Personality Rights) की सुरक्षा और मानहानि का दावा करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने याचिका में अपने खिलाफ मौजूद 52 दस्तावेजों/पोस्ट्स को हटाने की मांग की थी। हालांकि, जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने उनमें से सिर्फ 5 पोस्ट्स को ही हटाने का अंतरिम आदेश दिया, क्योंकि वे साफ तौर पर अश्लील और भद्दे थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाकी बचा हुआ कंटेंट मानहानिकारक नहीं है।


व्यंग्यात्मक आलोचना राजनीति का अपरिहार्य हिस्सा: जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद

सुनवाई के दौरान जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि किसी राजनीतिक दल के नेता द्वारा लिए गए फैसलों, जैसे गठबंधन बदलना या नीतियों में बदलाव पर आम जनता या विरोधी दलों की तरफ से तीखी आलोचना होना स्वाभाविक है। उन्होंने अपने आदेश में लिखा, "सत्ता के पदों पर बैठे सार्वजनिक हस्तियों को व्यंग्यात्मक मजाक का शिकार बनने को अपने पेशे का एक अनिवार्य हिस्सा मानना चाहिए, भले ही यह सब उन्हें व्यक्तिगत तौर पर बुरा लगता हो। किसी राजनीतिक फैसले पर किया गया व्यंग्य अपने-आप आपत्तिजनक या मानहानिकारक नहीं हो जाता।"


आरके लक्ष्मण के कार्टूनों का हवाला, संवेदनशीलता पर उठाए सवाल

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कोर्ट ने देश के महान कार्टूनिस्ट आरके लक्ष्मण का उदाहरण देते हुए कहा कि आज़ादी के बाद से ही देश के लोग राजनेताओं पर बनने वाले कार्टूनों को देखते हुए बड़े हुए हैं। कोर्ट ने कहा कि पहले सोशल मीडिया नहीं था, लेकिन अब इसका विस्तार बहुत ज़्यादा हो गया है। राघव चड्ढा के वकीलों ने दलील दी थी कि सोशल मीडिया पर उन्हें साड़ी पहने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन पर पैसे बरसाते हुए दिखाया गया है, जो यह दर्शाता है कि उन्होंने पैसे के लिए खुद को बेच दिया। इस पर जज ने तीखा सवाल किया, "एक राजनीतिक नेता के तौर पर, क्या आप इतने संवेदनशील हो सकते हैं? आखिरकार यह किसी व्यक्ति की आलोचनात्मक टिप्पणी ही तो है।"


दल बदलने के बाद शुरू हुआ था सोशल मीडिया पर विरोध

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे राघव चड्ढा इस साल अप्रैल (2026) में अचानक भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए थे। उनके इस फैसले के बाद से ही सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ मीम्स, पैरोडी और आलोचनात्मक पोस्ट की बाढ़ आ गई थी। चड्ढा के वकीलों ने कोर्ट से अंतरिम राहत (तुरंत पोस्ट हटाने) की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने अज्ञात प्रतिवादियों के इस मामले में किसी भी तरह की जल्दबाजी से इनकार करते हुए 'एमिकस क्यूरी' (न्यायालय मित्र) नियुक्त करने की बात कही है।