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बिहार-झारखंड समेत कई राज्यों कि अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला गिरफ्तार

देशभर की अदालतों और महत्वपूर्ण संस्थानों को दहलाने की धमकी देने वाले 'ईमेल कांड' का पर्दाफाश हो गया है। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने तकनीकी तफ्तीश के जरिए इस सनकी आरोपी को कर्नाटक से दबोच लिया है।

बिहार-झारखंड समेत कई राज्यों कि अदालतों को बम से उड़ाने की ध
बिहार-झारखंड समेत कई राज्यों कि अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला गिरफ्तार- फोटो : news 4 nation

बिहार-झारखंड समेत देश की अदालतों और संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला सनकी आदमी आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ ही गया है। देशभर की सुरक्षा एजेंसियों की नाक में दम करने वाला आरोपी श्रीनिवास लुइस (47 वर्ष) आखिरकार पकड़ा गया। दिल्ली पुलिस ने डिजिटल ट्रैकिंग और साइबर इन्वेस्टिगेशन की मदद से उसकी लोकेशन ट्रैक की, जो कर्नाटक के मैसूर में मिली। आरोपी वहां एक किराए के मकान में छिपकर रह रहा था। पुलिस ने मौके से एक लैपटॉप भी बरामद किया है, जिसका इस्तेमाल धमकी भरे ईमेल भेजने के लिए किया जाता था।

1100 से अधिक धमकी भरे ईमेल का रिकॉर्ड

जांच में सामने आया है कि श्रीनिवास ने एक-दो नहीं, बल्कि देश के विभिन्न संस्थानों, हाई कोर्ट, सिविल कोर्ट और सरकारी दफ्तरों को 1,100 से अधिक झूठे धमकी भरे संदेश भेजे थे। इन ईमेल के कारण बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों की अदालतों में हड़कंप मच गया था और सुरक्षा बलों को बार-बार तलाशी अभियान चलाना पड़ता था। अकेले रांची और पटना जैसे शहरों की अदालतों को भी इसी तरह की धमकियां मिली थीं।

डिजिटल फुटप्रिंट्स से खुला राज

लगातार मिल रही धमकियों के बाद दिल्ली पुलिस ने ईमेल ट्रेसिंग और तकनीकी जांच शुरू की। साइबर एक्सपर्ट्स ने ईमेल के 'आईपी एड्रेस' और सर्वर रूट्स को डिकोड किया, जिससे पुलिस सीधे मैसूर तक पहुँच गई। आरोपी तकनीकी रूप से शातिर था, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के डिजिटल जाल से बच नहीं सका। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि वह समाज से कटा हुआ और अकेले रहने वाला व्यक्ति है।

मानसिक स्थिति और आगे की जांच

पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, श्रीनिवास लुइस की मानसिक स्थिति स्थिर नहीं लग रही है। वह खुद को मानसिक रूप से विक्षिप्त बता रहा है, लेकिन पुलिस इसे केवल कानूनी कार्रवाई से बचने का बहाना भी मान रही है। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया जा रहा है, जहाँ उसकी मानसिक स्थिति की मेडिकल जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि इस 'साइबर आतंक' के पीछे उसका असली मकसद क्या था।

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