Bihar Crime: जमुई के बाद अब समस्तीपुर में लड़की से दरिंदगी, हैवानों ने सरेराह घसीटा, निजी अंग पर किया हमला, जंगलीपन- क्रूरता- वहशत के नंगा नाच से हड़कंप
Bihar Crime: जमुई के बाद अब समस्तीपुर से सामने आई हैवानियत की झकझोर देने वाली घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है।

Bihar Crime: बिहार में अब बेटियों की चीखें और सिसकियां घुलती जा रही हैं। जमुई के बाद अब समस्तीपुर से सामने आई हैवानियत की झकझोर देने वाली घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। राज्य में खाकी के इकबाल और कानून के पहरे पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। आखिर कब तक हमारी बहन-बेटियां दरिंदों की हवस और जंगलीपन का शिकार बनती रहेंगी?
सरेराह छेड़खानी और बैड-टच की घिनौनी करतूत
जमुई के बाद समस्तीपुर जिले के कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र अंतर्गत जगतसिंहपुर गांव के पास बांध बाइपास रोड पर एक नाबालिग लड़की के साथ हुई बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता एक लड़के के साथ सड़क से गुजर रही थी और रास्ते में तस्वीरें खींच रही थी। तभी कुछ स्थानीय शैतान ने उन्हें घेर लिया। इन सिरफिरे वहशियों ने न सिर्फ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज की, बल्कि लड़की के साथ सरेआम छेड़खानी और बैड-टच जैसी शर्मनाक हरकत को अंजाम दिया। इस पूरी काली करतूत का किसी ने वीडियो बना लिया जो अब तेजी से वायरल हो रहा है।
पुलिसिया तपिश और सियासत के खोखले दावे
घटना के तूल पकड़ने के बाद समस्तीपुर पुलिस हरकत में आ गई है। एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने इसे अतिसंवेदनशील मामला बताते हुए स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है और आरोपियों की पहचान में जुटी है। लेकिन सवाल यह है कि प्रशासन की नींद हमेशा वारदात के बाद ही क्यों खुलती है?
विकास के झूठे दावों के बीच दम तोड़ती सुरक्षा
एक तरफ हम चांद और मंगल ग्रह पर परचम फहराने और डिजिटल इंडिया के ढिंढोरा पीटते हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार की सड़कों पर हमारी बेटियां जानवरों से बदतर सुलूक झेल रही हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे सिर्फ कागजी और चुनावी भाषण बनकर रह गए हैं। साल 2012 के निर्भया कांड के बाद देश की राजधानी से लेकर पूरे देश में उबाल आया था, कड़े कानून बनाए गए थे, लेकिन समाज की रूढ़िवादी और विकृत मानसिकता में एक रत्तीभर भी बदलाव नहीं आया है। कानून बदले, साल बदले, तख्ता-पलट हुआ, परवानों की सूरत बदली मगर इन दरिंदों की नीयत और समाज की घटिया सोच आज भी वहीं की वहीं है।
जब तक शासन और प्रशासन मुस्तैदी से ऐसे शैतानों के खिलाफ खौफनाक और त्वरित कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक कागजी विकास के सारे दावे और आंकड़े पूरी तरह बेमानी साबित होते रहेंगे।
रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा















