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Bihar Nursing Crisis: बिहार में नर्सिंग शिक्षा पर बड़ा संकट, 40 संस्थानों पर गिरी गाज, PMCH से लेकर पावापुरी तक कार्रवाई की गूंज

Bihar Nursing Crisis: बिहार के नर्सिंग शिक्षा तंत्र पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल की कार्रवाई ने राज्य के कई नर्सिंग संस्थानों की मान्यता और छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Bihar Nursing Crisis
बिहार में नर्सिंग शिक्षा पर बड़ा संकट- फोटो : social Media

Bihar Nursing Crisis: बिहार के नर्सिंग शिक्षा तंत्र पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल की कार्रवाई ने राज्य के कई नर्सिंग संस्थानों की मान्यता और छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आधिकारिक  इंडियन नर्सिंग काउंसिल रिकॉर्ड में बिहार के कई एएनएम , जीएनएम , बीएससी नर्सिंग  संस्थानों की मान्यता वापस लेने अथवा उनकी राष्ट्रीय स्तर पर पात्रता सीमित करने के आदेश दर्ज हैं। कुछ मामलों में कार्रवाई प्रभावी होने की तारीख भी पिछली रखी गई है, जिससे छात्रों के बीच असमंजस और बेचैनी बढ़ गई है।सबसे बड़ा सवाल उन छात्रों का है, जिन्होंने ऐसे संस्थानों में दाखिला लेकर नर्सिंग की पढ़ाई की और अब डिग्री या डिप्लोमा के आधार पर नौकरी का सपना देख रहे हैं।  इंडियन नर्सिंग काउंसिल  के आधिकारिक आदेशों में साफ किया गया है कि कुछ प्रभावित संस्थानों की योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी केवल उसी राज्य में पंजीकरण के हकदार होंगे जहां उन्होंने योग्यता हासिल की है। इसका सीधा असर दूसरे राज्यों में रजिस्ट्रेशन और नौकरी के अवसरों पर पड़ सकता है।

कार्रवाई के पीछे सबसे बड़ा मुद्दा नर्सिंग शिक्षा के निर्धारित मानकों का पालन नहीं होना बताया जा रहा है। जांच और निरीक्षण से जुड़े मामलों में शिक्षकों की कमी, क्लिनिकल सुविधाओं का अभाव, प्रशिक्षण के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और मानकों में कमी जैसे सवाल सामने आए हैं। इंडियन नर्सिंग काउंसिल के एक आधिकारिक आदेश में बिहार के कई संस्थानों के बारे में कहा गया कि उन्होंने वर्षों तक वैधानिक निरीक्षण के लिए आवेदन नहीं किया और संस्थानों को नर्सिंग कार्यक्रम चलाने के लिहाज से अपर्याप्त/अनुपयुक्त पाया गया।यानी मामला महज कागजी मान्यता का नहीं, बल्कि उन संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों को मिलने वाली शैक्षणिक और क्लिनिकल ट्रेनिंग की गुणवत्ता का भी है।इस पूरे प्रकरण की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इंडियन नर्सिंग काउंसिल के रिकॉर्ड में पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जीएनएम नर्सिंग इंस्टीट्यूट और पावापुरी स्थित भगवान महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के बीएस सी कॉलेज जैसे संस्थानों के नाम भी दर्ज हैं।इंडियन नर्सिंग काउंसिल की सूची में इन संस्थानों के लिए अलग-अलग प्रभावी तारीखें दी गई हैं।आधिकारिक रिकॉर्ड में पश्चिम चंपारण के एमजेके अस्पताल  स्थित एएनएम स्कूल ऑफ नर्सिंग और भागलपुर के सदर अस्पताल स्थित एएनएम स्कूल जैसे संस्थान भी शामिल हैं। एक आदेश में एमजेके अस्पताल के संस्थान के मामले में क्लिनिकल और शिक्षण सुविधाओं में कमियों का उल्लेख किया गया है।

नर्सिंग छात्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता रजिस्ट्रेशन और रोजगार को लेकर है। दूसरे राज्यों में नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रेशन के बिना वहां की सरकारी या निजी नौकरियों में अवसर सीमित हो सकते हैं। केंद्र सरकार के अस्पतालों और दूसरे राष्ट्रीय संस्थानों में नर्सिंग पदों के लिए भी मान्यता और पंजीकरण से जुड़ी शर्तें अहम होती हैं।हालांकि हर प्रभावित संस्थान और हर बैच पर एक जैसा असर होगा, ऐसा मान लेना सही नहीं होगा। इंडियन नर्सिंग काउंसिल के आदेशों में प्रभावी तारीख अलग-अलग हैं। इसलिए छात्रों को यह देखना होगा कि उन्होंने किस संस्थान से, किस पाठ्यक्रम में और किस अवधि में योग्यता हासिल की है।

बिहार नर्सिंग रजिस्ट्रेशन व्यवस्था की तरफ से संस्थानों को कमियां दूर कर दोबारा निरीक्षण और मान्यता की प्रक्रिया में जाने का रास्ता बताया गया है। बिहार में नर्सिंग संस्थानों की मान्यता और एनओसी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए 2026 में नया डिजिटल पोर्टल भी शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य आवेदन, निरीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।

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बिहार नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल की वेबसाइट पर भी ट्रांसफर रजिस्ट्रेशन, माइग्रेशन, एनओसी और विदेशी वेरिफिकेशन जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन छात्रों ने फीस देकर वर्षों तक पढ़ाई की, उनके भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? अगर संस्थानों ने मानकों की अनदेखी की तो उसकी कीमत छात्रों को क्यों चुकानी पड़े? नर्सिंग जैसे पेशे में जहां प्रशिक्षित कर्मियों की लगातार जरूरत है, वहां शिक्षा व्यवस्था की खामियों का खामियाजा हजारों विद्यार्थियों के करियर पर पड़ना बेहद गंभीर मामला है।अब निगाह सरकार, इंडियन नर्सिंग काउंसिल और बिहार नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल पर है। छात्रों को सिर्फ मान्यता की बहाली का भरोसा नहीं, बल्कि उनकी डिग्री, रजिस्ट्रेशन और रोजगार के अधिकार पर स्पष्ट और लिखित समाधान चाहिए।