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इंडिगो के बाद इस विमान कंपनी के CEO का इस्तीफा, भारतीय विमानन क्षेत्र में नेतृत्व संकट

डिगो के बाद एअर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन ने दिया इस्तीफा। अहमदाबाद विमान हादसे और परिचालन चुनौतियों के बीच लिया फैसला। जानें क्या रहा उनका योगदान।

इंडिगो के बाद इस विमान कंपनी के CEO का इस्तीफा, भारतीय विमान

N4N Business - भारतीय एयरलाइंस इस समय नेतृत्व परिवर्तन के एक अभूतपूर्व दौर से गुजर रही हैं। इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स के पद छोड़ने के कुछ ही दिनों बाद अब एअर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशककैंपबेल विल्सनने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विल्सन, जिन्हें 2022 में पांच साल के अनुबंध पर नियुक्त किया गया था, उनका कार्यकाल जुलाई 2027 में समाप्त होना था। हालांकि, उन्होंने समय से पहले पद छोड़ने का निर्णय लिया है, जिससे विमानन जगत में हलचल तेज हो गई है।

इंडिगो और एअर इंडिया में एक साथ बड़े बदलाव

यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो में भी बदलाव हुआ है। इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने 10 मार्च को पद छोड़ा था, जिसके बाद 30 मार्च को विलियम वाल्श को नया सीईओ नियुक्त किया गया। प्रमुख एयरलाइंस के शीर्ष पदों पर यह फेरबदल तब हो रहा है जब विमानन उद्योग परिचालन बाधाओं, भारी वित्तीय घाटे और हालिया सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया संकट के कारण हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों ने परिचालन लागत और जटिलताओं को काफी बढ़ा दिया है।

अहमदाबाद दुर्घटना और इस्तीफे का दबाव


विल्सन के कार्यकाल के दौरान सबसे दुखद घटना 12 जून 2025 को हुई, जब एअर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर (फ्लाइट AI-171) अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस भीषण हादसे में 241 लोगों की मौतहो गई थी। इस त्रासदी के बाद से ही कैंपबेल विल्सन के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे थे और उनके इस्तीफे की मांग की जा रही थी। माना जा रहा है कि इस बड़ी सुरक्षा चूक और सार्वजनिक दबाव ने उनके समय से पहले हटने के फैसले में निर्णायक भूमिका निभाई है।

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निजीकरण के बाद एयरलाइन का कायाकल्प


अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए विल्सन ने एअर इंडिया के निजीकरण के बाद के सफर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उनके चार वर्षों के नेतृत्व में चार एयरलाइनों का सफल विलय हुआ और संगठन को सार्वजनिक क्षेत्र की पुरानी कार्यप्रणालियों से निकालकर एक आधुनिक निजी कॉर्पोरेट संस्कृति में ढाला गया। उन्होंने बेड़े में 100 अतिरिक्त विमानोंको जोड़ने और विमानों के आंतरिक हिस्सों (Interiors) के पूर्ण नवीनीकरण को अपनी टीम की एक बड़ी उपलब्धि बताया।

भविष्य की तैयारी और उत्तराधिकारी की खोज

एअर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि विल्सन ने 2024 में ही चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को 2026 में पद छोड़ने की अपनी मंशा बता दी थी। एयरलाइन के अनुसार, विल्सन तब तक अपने पद पर बने रहेंगे जब तक कि उनके उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं हो जाती। वर्तमान में एक चयन समिति का गठन किया गया है जो आने वाले महीनों में नए सीईओ की तलाश करेगी। चेयरमैन चंद्रशेखरन ने विल्सन के योगदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में एयरलाइन ने कई बाहरी और भू-राजनीतिक चुनौतियों का डटकर सामना किया।

विमानन उद्योग के लिए आगे की राह

वर्तमान में भारतीय विमानन क्षेत्र न केवल नेतृत्व परिवर्तन बल्कि विमानों की आपूर्ति (Supply Chain) संबंधी समस्याओं से भी जूझ रहा है। नए विमानों की डिलीवरी में देरी और तकनीकी मरम्मत के लिए पुर्जों की कमी ने एयरलाइंस के विस्तार कार्यक्रमों को प्रभावित किया है। ऐसे में एअर इंडिया और इंडिगो जैसे बड़े खिलाड़ियों के लिए नए नेतृत्व का चयन करना एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि उन्हें न केवल लाभप्रदता सुनिश्चित करनी होगी, बल्कि यात्रियों के बीच सुरक्षा और विश्वसनीयता को भी फिर से स्थापित करना होगा।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और मंत्रालय को इस बदलाव की आधिकारिक सूचना दे दी गई है। एअर इंडिया को निर्देशित किया गया है कि नेतृत्व परिवर्तन के इस संक्रमण काल के दौरान सुरक्षा मानकों और यात्री सेवाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र को सक्रिय रखा गया है।