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मानवता शर्मसार: श्मशान जाने के लिए दुकानदारों ने नहीं दिया रास्ता, बीच सड़क चौराहे पर किया गया बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार

श्मशान घाट जाने वाले रास्ते पर अतिक्रमण के कारण, एक मजबूर महादलित परिवार को अपनी 91 वर्षीय बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार बीच सड़क चौराहे पर ही करना पड़ा। यह घटना न केवल स्थानीय दबंगों के हौसले को दर्शाती है

मानवता शर्मसार: श्मशान जाने के लिए दुकानदारों ने नहीं दिया र

Vaishali : बिहार के वैशाली जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासन की अनदेखी और स्थानीय अतिक्रमण का खौफनाक चेहरा तब दिखा जब एक महादलित परिवार को अपने घर की बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार बीच सड़क पर ही करना पड़ा। यह हृदयविदारक मामला गरौल थाना क्षेत्र के सोनधो मुबारकपुर मांझी टोला का है।

दुकानदारों ने रोका रास्ता, बीच सड़क जली चिता

मिली जानकारी के अनुसार, 91 वर्षीय झपकी देवी के निधन के बाद परिजन जब शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जा रहे थे, तो उन्हें रास्ते में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि श्मशान जाने वाले पारंपरिक रास्ते पर स्थानीय दुकानदारों ने अतिक्रमण कर लिया है। जब परिजन शव लेकर आगे बढ़े, तो दबंगों और दुकानदारों ने उन्हें रास्ता देने से साफ मना कर दिया और शव को आगे ले जाने से रोक दिया। घंटों की मशक्कत और विवाद के बाद, थक-हारकर परिजनों ने प्रशासन के प्रति अपना आक्रोश और मजबूरी जताते हुए बीच चौराहे पर ही चिता सजाई और अंतिम संस्कार कर दिया।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल


हैरानी की बात यह है कि घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना की पुलिस मौके पर तो पहुँची, लेकिन घंटों तक 'मूकदर्शक' बनी रही। ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता लंबे समय से बंद है और स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद आज तक अतिक्रमण हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

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परिजन जगदीश मांझी  ने कहा कि"हमें जाने का रास्ता चाहिए। थाना प्रभारी आए, लेकिन दुकानदारों ने रास्ता नहीं दिया। रास्ता सब बंद है, इसलिए हम सड़क पर ही दाह संस्कार कर रहे हैं।

प्रशासन के गाल पर 'तमाचा'

बीच सड़क पर धधकती चिता की यह तस्वीर सुशासन और विकास के दावों के बीच प्रशासनिक विफलता की जीती-जागती मिसाल है। यह घटना दर्शाती है कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों के लिए गरिमापूर्ण विदाई भी कितनी कठिन हो सकती है। अतिक्रमणकारियों का दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि वे अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्यों में भी बाधा डाल रहे हैं और पुलिस केवल मूकदर्शक बनी हुई है।

Report - Rishav kumar