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जिले के सबसे बड़े अस्पताल में चोरों का आतंक, 93 गार्ड के बीच बाइक और ऑटो की हो जा रही चोरी, सुरक्षा पर बड़ा सवाल

जिला मुख्यालय हाजीपुर स्थित सदर अस्पताल इन दिनों मरीजों के इलाज के बजाय चोरों के आतंक के कारण चर्चा में है। भारी-भरकम सुरक्षा अमले की तैनाती के बावजूद अस्पताल परिसर से वाहनों की चोरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे अस्पताल प्रबंधन और स

जिले के सबसे बड़े अस्पताल में चोरों का आतंक, 93 गार्ड के बीच

Vaishali - वैशाली जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र, सदर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था कागजों पर बेहद मजबूत नजर आती है। यहाँ की सुरक्षा का जिम्मा 88 निजी गार्ड और 5 होमगार्ड के जवानों के कंधों पर है, जो पांच अलग-अलग शिफ्टों में 24 घंटे तैनात रहते हैं। हैरानी की बात यह है कि 93 सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद चोर बेखौफ होकर अस्पताल परिसर में अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

बाइक के बाद अब टोटो की चोरी, सीसीटीवी में कैद हुए चोर 

अस्पताल में चोरी की वारदातों ने अब सारी हदें पार कर दी हैं। आए दिन बाइक और मोबाइल चोरी होने की शिकायतों के बीच, आज चोरों ने दुस्साहस दिखाते हुए परिसर से एक पूरी टोटो (ई-रिक्शा) गाड़ी ही पार कर दी। हालांकि, यह पूरी घटना अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है, लेकिन पूर्व के अनुभवों को देखते हुए पीड़ितों को इस बार भी मामले के उद्भेदन या वाहन की बरामदगी की उम्मीद बेहद कम नजर आ रही है।

अधिकारियों की चुप्पी और प्रबंधन की लापरवाही 

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सबसे चिंताजनक पहलू अस्पताल प्रबंधन और वरीय अधिकारियों का उदासीन रवैया है। लगातार हो रही सेंधमारी के बावजूद अब तक सुरक्षा व्यवस्था की न तो कोई उच्चस्तरीय समीक्षा की गई है और न ही लापरवाह सुरक्षाकर्मियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन ने इन घटनाओं को नियति मान लिया है, जिसका खामियाजा दूर-दराज से आए गरीब मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है।

हाई सिक्योरिटी जोन में बड़ा जोखिम 

बता दें कि यह अस्पताल परिसर न केवल मरीजों के लिए अहम है, बल्कि यहाँ स्वास्थ्य विभाग के कई बड़े अधिकारियों के आवास और महत्वपूर्ण कार्यालय भी स्थित हैं। जिले का 'पावर सेंटर' होने के नाते इसे हाई सिक्योरिटी जोन माना जाता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में लगातार हो रही चोरियां यह दर्शाती हैं कि चोरों के मन से कानून का डर पूरी तरह समाप्त हो चुका है और सुरक्षा के नाम पर तैनात जवान केवल खानापूर्ति कर रहे हैं।

मरीजों और परिजनों में डर का माहौल 

जिले के कोने-कोने से आने वाले मरीज पहले से ही बीमारी और आर्थिक तंगी से परेशान होते हैं, ऐसे में अस्पताल परिसर से उनके वाहनों या कीमती सामान का चोरी हो जाना उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। स्थानीय लोगों की मांग है कि निजी सुरक्षा एजेंसी की जवाबदेही तय की जाए और अस्पताल परिसर में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लग सके।

Report - Rishav kumar