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Bihar Crime: लालगंज थानेदार,दरोगा पर FIR का डीआईजी ने दिया आदेश, 50 लाख कैश, 2 किलो सोना और 6 किलो चांदी की चोरी का है आरोप, वर्दी पर लगा सबसे बड़ा दाग,विभाग में हड़कंप

सोना और नगद गवन मामले में जांच पूरी होने के बाद डीआईजी ने लालगंज थाना अध्यक्ष संतोष कुमार और अवर निरीक्षक सुमन जी झा के खिलाफ प्राथमिक दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है।

 लालगंज थानेदार,दरोगा पर FIR का आदेश
लालगंज थानेदार,दरोगा पर FIR का आदेश- फोटो : reporter

Bihar Crime: वैशाली के लालगंज थाना क्षेत्र से कानून-व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां चोरी के माल पर हाथ साफ करने के आरोप में खुद पुलिस कटघरे में खड़ी हो गई है। सोना और नगद गवन मामले में जांच पूरी होने के बाद डीआईजी ने लालगंज थाना अध्यक्ष संतोष कुमार और अवर निरीक्षक सुमन जी झा के खिलाफ प्राथमिक दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है। इस सनसनीखेज मामले की जानकारी खुद डीआईजी जयंत कांत ने दी है।

मामला 31 दिसंबर का है, जब लालगंज एसडीपीओ गोपाल मंडल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया था कि थानाध्यक्ष संतोष कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि बिलनपुर गांव निवासी रामप्रीत सहनी के घर में चोरी का भारी माल छिपाकर रखा गया है और अपराधी उसका बंटवारा कर रहे हैं। सूचना के सत्यापन के बाद वरीय अधिकारियों के निर्देश पर संतोष कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापेमारी की। पुलिस वाहन देखते ही 5-6 अपराधी मौके से फरार हो गए, जबकि रामप्रीत सहनी की पत्नी को हिरासत में लिया गया।

छापेमारी में चोरी के बर्तन, टीवी, कारतूस समेत कई सामान बरामद किए गए। पूछताछ में महिला ने कबूल किया कि उसका पति गंज इलाके में चोरी और सेंधमारी की वारदातों को अंजाम देता रहा है। लेकिन यहीं से कहानी ने खतरनाक मोड़ ले लिया। जांच में खुलासा हुआ कि छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकद और कीमती धातु करीब 50 लाख रुपये कैश, 2 किलो सोना और 6 किलो चांदीभी बरामद हुई थी, जिसे न तो जब्ती सूची में दर्ज किया गया और न ही आधिकारिक रिकॉर्ड में दिखाया गया।

एसपी ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग भी नहीं की गई, जो संदेह को और गहरा करती है। मामले की सूचना डीआईजी को दी गई, जिसके बाद दोनों पुलिस अधिकारियों को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया। गोपनीय जांच में साफ हुआ कि बरामदगी के बावजूद जानबूझकर उसे दस्तावेजों से गायब किया गया। डीआईजी ने इसे “वर्दी को शर्मसार करने वाली घटना” करार दिया।

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सब इंस्पेक्टर सुमन जी झा पहले भी विवादों में रहे हैं। वर्ष 2024 में मुजफ्फरपुर में पोस्टिंग के दौरान उन्हें 11 हजार रुपये घूस लेते हुए निगरानी टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। वह मामला अब भी कोर्ट में लंबित है।

अब FIR के आदेश के बाद सवाल यह है कि क्या कानून के रखवाले खुद कानून के शिकंजे में कसेंगे? या फिर यह मामला भी सिस्टम की फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, लालगंज कांड ने वर्दी की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

रिपोर्ट- ऋषभ कुमार