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Bihar News:दलित महिला की सड़क पर ही चिता जलाने के मामले में न्यूज़4नेशन की खबर पर जागा प्रशासन, अधिकारियों ने मौके पर मौजूद चश्मदीदों के बयान किए दर्ज , लाश पर सिस्टम की बेरुखी से हलकान हुए लोग

Bihar News: कहते हैं मौत के बाद इंसान की सारी अदावतें' खत्म हो जाती हैं, लेकिन हाजीपुर के गोरौल में जो हुआ उसने इंसानियत के दामन पर ऐसा दाग लगाया है जिसे धोना प्रशासन के लिए नामुमकिन होगा।...

administration woke up to News4Nation s news regarding  burn
दलित महिला की सड़क पर ही चिता जलाने के मामले में न्यूज़4नेशन की खबर पर जागा प्रशासन- फोटो : reporter

Bihar News: कहते हैं मौत के बाद इंसान की सारी अदावतें' खत्म हो जाती हैं, लेकिन हाजीपुर के गोरौल में जो हुआ उसने इंसानियत के दामन पर ऐसा दाग लगाया है जिसे धोना प्रशासन के लिए नामुमकिन होगा। सोधो गाछी चौक पर जब एक दलित महिला की अर्थी को शमशान नसीब नहीं हुआ, तो मजबूर परिजनों ने बीच सड़क पर ही चिता कोआग के हवाले कर दिया।

इस खौफनाक मंजर की खबर जब न्यूज़4नेशन ने बेबाकी से उठाई, तो हुक्मरानों की नींद टूटी। शुक्रवार की सुबह वैशाली की जिलाधिकारी बर्षा सिंह, पुलिस कप्तान  डीडीसी और एसडीपीओ समेत आला अधिकारियों का काफिला घटनास्थल पर पहुंचा। प्रशासन की इस दौड़-धूप को देखकर ऐसा लगा मानो सांप निकल जाने के बाद लकीर पीटी जा रही हो।

बीते गुरुवार को सोधो गाछी चौक पर एक दलित महिला की मौत के बाद जो तमाशा हुआ, उसने सामाजिक समरसता की कलई खोल दी। श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते पर कुछ दबंगों का कब्जा या विवाद इस कदर हावी था कि शव ले जाने की हिम्मत कोई न जुटा सका। थक-हार कर परिजनों ने बीच सड़क को ही केंद्र बनाया और वहीं अंतिम संस्कार कर दिया।

घटनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से रूबरू होकर विवाद की जड़ को समझने की कोशिश की। डीएम बर्षा सिंह ने सख्ती दिखाते हुए साफ किया कि रास्ते का विवाद अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विवादित जमीन और रास्ते की निशानदेही करने का निर्देश दिया गया।

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 दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई ताकि भविष्य में ऐसी 'घिनौनी' वारदात दोबारा न हो। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद चश्मदीदों के बयान दर्ज किए।

यह सिर्फ एक दाह संस्कार नहीं था, बल्कि व्यवस्था के जनाजे जैसा था। जब मजलूमों को आखिरी सफर के लिए दो गज जमीन के वास्ते सड़क पर बैठना पड़े, तो समझ लीजिए कि कानून का इकबाल खत्म हो चुका है। हालांकि अब प्रशासन ने संज्ञान लिया है, लेकिन सवाल वही है क्या ये सक्रियता सिर्फ सुर्खियों तक सीमित रहेगी या दलित परिवार को असल मायने में इंसाफ मिलेगा?

रिपोर्ट- ऋषभ कुमार