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टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर मिशन मोड में सुपौल प्रशासन, 4 जुलाई से रोजाना 7,250 लोगों की होगी स्क्रीनिंग

सुपौल जिले को टीबी मुक्त बनाने को लेकर जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिले में टीबी स्क्रीनिंग का लक्ष्य हर हाल में शत-प्रतिशत पूरा किया जाए ....

टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर मिशन मोड में सुपौल प्रशासन, 4
टीबी मुक्त होगा सुपौल जिला- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में "टीबी मुक्त भारत अभियान" को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विस्तृत चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिले में टीबी स्क्रीनिंग का लक्ष्य हर हाल में शत-प्रतिशत पूरा किया जाए और इस अभियान को मिशन मोड में चलाया जाए।


4 जुलाई से शुरू होगा महाअभियान

अभियान के तहत 4 जुलाई (2026) से जिले के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों, प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, अनुमंडल और सदर अस्पताल में प्रतिदिन बड़े पैमाने पर टीबी स्क्रीनिंग की जाएगी। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों की जांच कर संभावित मरीजों की समय रहते पहचान करना है, ताकि उनका सही समय पर इलाज शुरू किया जा सके। बैठक में एक्स-रे जांच, टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) और निश्चय मित्र योजना के तहत फूड बास्केट वितरण जैसे संकेतकों पर भी शत-प्रतिशत काम करने को कहा गया है।


सामूहिक भागीदारी से सफल बनेगा अभियान

जिलाधिकारी ने साफ तौर पर कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रशासन और समाज की सामूहिक भागीदारी से ही संभव होगा। इसके लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, जीविका, शिक्षा और कृषि विभाग के प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को संयुक्त रूप से अभियान की नियमित निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भी इस पूरी प्रक्रिया का लगातार निरीक्षण करेंगे।


जमीनी स्तर पर जन-जागरूकता की तैयारी

अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए विकास मित्र, आंगनबाड़ी सेविकाएं, जीविका दीदियां, कृषि सलाहकार और पंचायती राज के जनप्रतिनिधियों को जन-जागरूकता फैलाने के काम में लगाया गया है। इसके साथ ही आशा कार्यकर्ताओं को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे घर-घर जाकर संभावित टीबी मरीजों और उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान करें, उन्हें जांच केंद्रों तक लाएं और प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट के लिए प्रेरित करें।


रोजाना 7,250 लोगों की जांच का बड़ा लक्ष्य

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तय कार्य योजना के मुताबिक, प्रत्येक मोबाइल मेडिकल टीम (चलंत चिकित्सा दल) को प्रतिदिन कम से कम 150 लोगों की स्क्रीनिंग करनी होगी। इस प्रकार जिले के सभी 11 प्रखंडों में रोजाना कुल 7,250 लोगों की टीबी स्क्रीनिंग का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बैठक में उप विकास आयुक्त सारा अशरफ, सिविल सर्जन बाबू साहब झा समेत कई जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे, जिन्हें आपसी समन्वय के साथ तय समय सीमा में काम पूरा करने की हिदायत दी गई है।

विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट