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जन सुराज का सरकारी स्कूलों में 55 करोड़ के मजदूरी घोटाले का दावा, हाउसकीपिंग योजना में बड़े पैमाने पर धांधली का लगाया आरोप

जन सुराज पार्टी के सुपौल जिलाध्यक्ष ने जिले के सरकारी स्कूलों में बड़ा घोटाला होने का दावा किया है। वहीं उन्होंने स्कूलों के हाउसकीपिंग योजना में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया है......

जन सुराज का सरकारी स्कूलों में 55 करोड़ के मजदूरी घोटाले का
जन सुराज का बड़ा दावा- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिले के सरकारी स्कूलों में साफ-सफाई के लिए संचालित हाउसकीपिंग योजना में गंभीर अनियमितताओं और भारी मजदूरी घोटाले का मामला प्रकाश में आया है। जन सुराज के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने शिक्षा विभाग, संबंधित एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि जिले के सरकारी विद्यालयों में तैनात 1800 से अधिक सफाईकर्मियों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है और उन्हें श्रम कानून के तहत निर्धारित अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।

न्यूनतम मजदूरी की अनदेखी और 55 करोड़ का घोटाला 

जन सुराज जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह का दावा है कि सरकारी आंकड़ों और विभागीय भुगतानों के विपरीत सफाईकर्मियों को महज 1000 से 1500 रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रम कानून के तहत निर्धारित न्यूनतम मजदूरी और एजेंसियों को दिए जाने वाले कुल बजटीय आवंटन के बीच बड़ा अंतर है। इसी विसंगति के आधार पर उन्होंने पिछले तीन वर्षों के दौरान लगभग 55 करोड़ रुपये के मजदूरी घोटाले का दावा किया है। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र विभागीय पुष्टि होना बाकी है।

ईपीएफ, ईएसआई और बायोमेट्रिक सुविधाओं से वंचित करने का दावा 

आरोपों के मुताबिक, संविदा शर्तों और विभागीय दिशानिर्देशों के बावजूद सफाईकर्मियों को ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI) और बीमा जैसी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ नहीं दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कर्मियों को यूएएन (UAN) नंबर आवंटन, मोबाइल लिंकिंग, बायोमेट्रिक उपस्थिति, निर्धारित ड्रेस तथा पहचान पत्र जैसी अनिवार्य शर्तों का पालन भी धरातल पर नहीं हो रहा है। इतना ही नहीं, स्कूलों में सफाई सामग्री और प्लंबिंग जैसे रखरखाव कार्यों की आपूर्ति में भी व्यापक लापरवाही का आरोप लगाया गया है।

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पूर्व की जांच और जुर्माने के बावजूद स्थिति जस की तस 

अनिल कुमार सिंह ने याद दिलाया कि 15 फरवरी 2024 को पूर्णिया और कोसी प्रमंडल की समीक्षा बैठक में भी स्कूलों में गंदगी और खराब सफाई व्यवस्था का मुद्दा उठा था, जिसके बाद तीन एजेंसियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। बाद में 5 अप्रैल 2025 को मरौना प्रखंड के निरीक्षण तथा 15 अप्रैल को जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी के बावजूद व्यवस्था में कोई सुदृढ़ सुधार नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी कई प्रखंडों से गलत रिपोर्ट बनवाकर उन्हीं एजेंसियों के सेवा विस्तार की अनुशंसा की जा रही है।

मामले की निष्पक्ष जांच और वित्तीय ऑडिट की मांग 

जन सुराज के जिलाध्यक्ष ने शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों, हाउसकीपिंग एजेंसियों और बिचौलियों की भूमिका की गहन जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सफाईकर्मियों को बकाया श्रम मानदेय के साथ-साथ सभी वैधानिक सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने पिछले वर्षों में एजेंसियों को दिए गए कुल बजट का निष्पक्ष वित्तीय ऑडिट कराने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व एजेंसियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।

विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट