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Bihar News : बिहार के कई जिलों में आंधी पानी ने मचाई तबाही, लाखों की फसल का हुआ नुकसान

Bihar News : बिहार के कई जिलों में आंधी पानी ने भारी तबाही मचाई है. इससे लाखों की फसल को नुकसान पहुंचा है......पढ़िए आगे

Bihar News : बिहार के कई जिलों में आंधी पानी ने मचाई तबाही,
आंधी पानी ने मचाई तबाही - फोटो : SOCIAL MEDIA

SHEOHAR : बीते शाम से लगातार हों रही आंधी और बारिश ने जिले के किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। जहां एक ओर इस बारिश से आम और लीची के फसल को हल्का फायदा पहुंचा है, वहीं गेहूं और मक्का के किसानों पर यह मौसम आफत बनकर टूटा है। तेज हवा के कारण जिले के सैकड़ों एकड़ में लगी गेहूं और मक्का की फसलें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कई खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह टूटकर जमीन पर बिछ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से किसान अपने खेतों का मुआयना कर मायूस लौट रहे हैं। किसानों का कहना है कि गेहूं और मक्का का यह सीजन उनके लिए आमदनी का मुख्य स्रोत था, लेकिन तूफान और बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। नुकसान के बाद ग्रामीण किसान परिवार आर्थिक संकट की आशंका जता रहे हैं और सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। “फसलों के नुकसान की जानकारी लगातार मिल रही है। इस बाबत सभी कृषि प्रखंड पदाधिकारी को जांच का निर्देश दिया गया है. जांच रिपोर्ट आने के बाद  कार्रवाई की जाएगी उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।स्थानीय किसानों के अनुसार, तेज हवा और हल्की वर्षा ने आम और लीची की बागवानी को थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन भारी बारिश और तूफान ने खेतों में खड़ी अनाज वाली फसलों का बड़ा नुकसान कर दिया है।

मक्का उत्पादन के लिए मशहूर कटिहार जिसे सीमांचल का मकानचल कहा जाता है। इस बार प्राकृतिक आपदा की मार से कराह उठा है। कटिहार जिले के दलन पूरब पंचायत की बात करें तो यहां हालात बेहद चिंताजनक है, किसानों के मुताबिक करीब 200 एकड़ में लगी मक्का और गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। खेतों में जहां कुछ दिन पहले तक लहलहाती फसले थी। अब वहां फसले जमीन पर बिछ चुकी है। किसान राजेश सिंह का कहना है कि उन्होंने इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद में मेहनत और लागत लगाई थी। बीज, खाद और सिंचाई का खर्च करने के बाद अब अचानक आई इस बारिश और तूफान ने सब कुछ चौपट कर दिया। किसान रविशंकर श्रवण की माने तो इस नुकसान की भरपाई करना उसके लिए आसान नहीं होगा। उन्होंने बेटी की शादी के लिए अच्छी फसल बुवाई की थी, लेकिन सब कुछ बर्बाद हो गया है। किसान दिनेश ठाकुर का कहना है कि कई किसान खेती पर ही निर्भर है। कुछ किसानों ने बैंक से कर्ज लेकर खेती की है ऐसे में फसल नुकसान के बाद उसकी भरपाई करना मुश्किल है। सबसे बड़ी चिंता यह है की मौसम का यह कहर ऐसे समय पर टूटा है, जब फसल कटाई के करीब थी। यानी मेहनत का फल मिलने ही वाला था लेकिन उससे पहले ही प्रकृति ने झटका दे दिया। कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी ऐसे में अब उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। फिलहाल सीमांचल का मकानचल मौसम की मार से सहमा हुआ है और किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहे हैं अब क्या होगा।

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वहीँ तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने पूर्णिया जिले के धमदाहा अनुमंडल क्षेत्र के किसानों की कमर तोड़ दी। मौसम के अचानक बदले मिजाज ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। आम, लीची और केले के बागानों के साथ-साथ गेहूं और सबसे अधिक मक्के की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। सिर्फ धमदाहा प्रखंड में ही हजारों एकड़ फसल के नष्ट होने की बात सामने आ रही है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। खेतों में जहां-तहां गिरी फसलें किसानों की बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं। प्रभावित किसानों ने आंखों में आंसू लिए अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि एक ओर प्रकृति की मार और दूसरी ओर सरकारी उदासीनता ने उनकी स्थिति और भी दयनीय बना दी है। किसानों का कहना है कि पिछले साल भी आंधी-तूफान से फसल बर्बाद हुई थी, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिल पाया। किसी तरह कर्ज लेकर इस बार खेती की, लेकिन इस बार की तबाही ने पूरी उम्मीद ही खत्म कर दी है। किसानों ने कहा कि “अब तो हालात ऐसे हो गए हैं कि खेती करना भी मुश्किल लगने लगा है। अगर इस बार भी मुआवजा नहीं मिला, तो हम खेती-बारी से विमुख हो जाएंगे और समाज की मुख्य धारा से कटने को मजबूर हो जाएंगे।” खेतों में बर्बादी का मंजर साफ देखा जा सकता है। मक्के की फसल जमीन पर गिर चुकी है, गेहूं की बालियां टूट गई हैं, वहीं फलदार पेड़ों से कच्चे फल झड़कर बर्बाद हो गए हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। इधर, प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कदम उठाने की बात कही है। एसडीओ अनुपम ने बताया कि अनुमंडल के सभी चारों प्रखंडों के प्रखंड कृषि पदाधिकारियों (बीएओ) को फसल क्षति का सर्वेक्षण करने का निर्देश दे दिया गया है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसान मुआवजे की आस लगाए आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बार उन्हें समय पर राहत मिल पाएगी या फिर एक बार फिर उनकी उम्मीदें अधूरी ही रह जाएंगी।

बीते 24 घंटों से मुजफ्फरपुर में आंधी और बारिश से किसानों को भारी नुकसान हुआ। खेतों में तैयार गेहूं और आलू की फसल बर्बाद हो गई। वही आम और लीची के फसल को भी भारी नुकसान का अनुमान है मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट, कटरा मीनापुर के साथ कई अन्य क्षेत्रों में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। जिसके कारण किसानों की परेशानी अत्यधिक बढ़ गई है किसानों का कहना है की वह कर्ज लेकर खेती किए थे लेकिन आंधी और बारिश के कारण उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई है। वही किसान विजय कुमार राय ने बताया कि आंधी और बारिश के  कारण खेत में गेंहू और आलू की तैयार फसल को भारी नुकसान हुआ है साथ ही लीची और आम के मंजर को भी क्षति पहुंचा है। वही उनका कहना है की अचानक हुई जबरदस्त बारिश और ओलावृष्टि हुई, जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। बेमौसम बारिश से फसल बर्बाद हो गई। अब कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है। बता दे कि मुजफ्फरपुर जिले के अलग अलग जगहों पर बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई।

शिवहर से मनोज, पूर्णिया से अंकित, कटिहार से श्याम और मुजफ्फरपुर से मणिभूषण की रिपोर्ट