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Bihar News: विकास के नक्शे से बाहर हुआ शिवहर! आर्थिक सर्वे में बिहार का सबसे गरीब जिला घोषित, सियासत के दावों पर जमीनी हकीकत पड़ा भारी

Bihar News: शिवहर एक बार फिर बिहार की सियासत और विकास बहस के केंद्र में आ गया है। ...

Sheohar named Bihar s poorest district in Economic Survey re
विकास के नक्शे से बाहर हुआ शिवहर!- फोटो : reporter

Bihar News: शिवहर एक बार फिर बिहार की सियासत और विकास बहस के केंद्र में आ गया है। विधानसभा में पेश बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने राज्य के सभी 38 जिलों की आर्थिक रैंकिंग जारी कर दी है, जिसमें शिवहर को बिहार का सबसे गरीब जिला बताया गया है। सर्वे के मुताबिक, जहां राजधानी पटना राज्य का सबसे समृद्ध जिला बनकर उभरा है, वहीं शिवहर विकास की दौड़ में सबसे पीछे छूट गया है। यह रिपोर्ट सरकार के विकास दावों और ज़मीनी सच्चाई के बीच गहरे फासले को उजागर करती है।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रति व्यक्ति आय के मामले में पटना पहले, बेगूसराय दूसरे और मुंगेर तीसरे स्थान पर हैं। वहीं शिवहर की प्रति व्यक्ति आय महज 18,980 रुपये दर्ज की गई है, जो राज्य में सबसे कम है। इसके बाद अररिया (19,795 रुपये) और सीतामढ़ी (21,448 रुपये) का स्थान आता है। आंकड़े बताते हैं कि पटना की प्रति व्यक्ति आय, शिवहर की तुलना में लगभग छह गुना अधिक है। यह फर्क केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि दशकों की उपेक्षा और नीतिगत असंतुलन का आईना है।

शिवहर के पिछड़ेपन की सबसे बड़ी वजह यहां उद्योग-धंधों का अभाव और आज़ादी के बाद से अब तक रेल सुविधा का न पहुंच पाना माना जा रहा है। ऊपर से बाढ़ और सुखाड़ की दोहरी मार ने किसानों की कमर तोड़ रखी है। कभी बागमती का उफान, तो कभी बारिश का धोखा किसान हर साल कर्ज और नुकसान के दलदल में फंसते चले गए। नतीजा यह कि जिले की आर्थिक हालत दिन-ब-दिन बदतर होती गई।

हालांकि हाल के दिनों में सरकार ने शिवहर के लिए कुछ बड़े ऐलान जरूर किए हैं। उद्योग स्थापना को स्वीकृति दी गई है, रेल पटरी बिछाने का काम शुरू हुआ है और बागमती नदी पर डैम निर्माण की प्रक्रिया भी जारी है। जिलाधिकारी प्रतिभा रानी का दावा है कि अगले एक-दो वर्षों में शिवहर की तस्वीर बदलेगी। तीन प्रस्तावित एक्सप्रेसवे, रेल कनेक्टिविटी और डैम से सिंचाई सुविधा मिलने के बाद जिले की रैंकिंग में सुधार देखने को मिलेगा।

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शिक्षा के मोर्चे पर भी शिवहर पिछड़ा हुआ है। उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और मोतिहारी का रुख करना पड़ता है। खासकर छात्राओं के लिए यह सफर परेशानी भरा है। जिले में मात्र एक डिग्री कॉलेज है, जहां संसाधनों की भारी कमी है।

कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वेक्षण ने शिवहर की हकीकत को बेपर्दा कर दिया है। अब सवाल यह है कि क्या सरकारी योजनाएं कागज़ों से निकलकर ज़मीन पर उतरेंगी, या फिर शिवहर यूं ही विकास की दौड़ में सबसे पीछे खड़ा रहेगा।

रिपोर्ट- मनोज कुमार