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शेरशाह के मकबरे में मौत का तालाब! 8-10 क्विंटल मछलियां मरीं, पर्यटकों को दिखी धरोहर की बदसूरत तस्वीर

Bihar News: सासाराम के ऐतिहासिक शेरशाह सूरी के मकबरे के तालाब में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत ने प्रशासनिक व्यवस्था और ऐतिहासिक धरोहर के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शेरशाह के मकबरे में मौत का तालाब! 8-10 क्विंटल मछलियां मरीं,
शेरशाह के मकबरे में मौत का तालाब!- फोटो : reporter

Bihar News: सासाराम के ऐतिहासिक शेरशाह सूरी के मकबरे के तालाब में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत ने प्रशासनिक व्यवस्था और ऐतिहासिक धरोहर के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मकबरे के परिसर स्थित तालाब में अचानक भारी मात्रा में मछलियां मरने से इलाके में हड़कंप मच गया। शुरुआती तौर पर पानी के दूषित होने को मछलियों की मौत की संभावित वजह बताया जा रहा है।तालाब में मछली पालन का जिम्मा संभालने वाले संवेदक मछुआरा दीना चौधरी के मुताबिक इस बार करीब 8 से 10 क्विंटल मछलियां मर गई हैं। इससे करीब 4 से 5 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है। उनका दावा है कि यह पहली बार नहीं है। पिछले एक साल में तीन से चार बार तालाब में मछलियों के मरने की घटना हो चुकी है।

मछली पालन से जुड़े लोगों का आरोप है कि तालाब में साफ पानी पहुंचाने और गंदा पानी बाहर निकालने के लिए पहले नहर के जरिए जल निकासी की व्यवस्था थी। लेकिन यह सिस्टम पिछले कई वर्षों से ठप पड़ा है। इसके चलते तालाब में गंदा पानी जमा होता जा रहा है।दीना चौधरी का कहना है कि पानी के लगातार दूषित होते जाने का सीधा असर मछलियों पर पड़ रहा है। बार-बार मछलियों के मरने से मछली पालन से जुड़े लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।अब सवाल यह है कि अगर जल निकासी और साफ पानी की व्यवस्था वर्षों से बंद है तो इसकी मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? ऐतिहासिक मकबरे के तालाब की हालत लगातार बिगड़ने के बावजूद जिम्मेदार एजेंसियों ने इस दिशा में स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला?

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के सहायक संरक्षक अमृत झा ने फोन पर बताया कि पानी फिल्टर नहीं होने के कारण यह समस्या उत्पन्न हो रही है। यानी पानी की गुणवत्ता और उसके शुद्धिकरण की व्यवस्था को मछलियों की मौत से जोड़कर देखा जा रहा है।मकबरे का तालाब सिर्फ मछली पालन का केंद्र नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक स्मारक परिसर का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। ऐसे में पानी के दूषित होने का असर केवल मछलियों तक सीमित नहीं है।

शेरशाह सूरी का मकबरा बिहार की ऐतिहासिक पहचान और स्थापत्य विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। तालाब का दूषित पानी और बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां परिसर के सौंदर्य और पर्यटक अनुभव को प्रभावित कर रही हैं।एक तरफ ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित रखने की कवायद होती है, वहीं दूसरी तरफ उसके परिसर में मौजूद तालाब की जल व्यवस्था अगर वर्षों से बदहाल है तो यह संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।बार-बार मछलियों की मौत से अब मामला सिर्फ 4-5 लाख रुपये के आर्थिक नुकसान का नहीं रह गया है। यह सवाल ऐतिहासिक धरोहर की देखरेख, जल प्रबंधन और पर्यावरणीय सुरक्षा से भी जुड़ गया है।जरूरत है कि तालाब के पानी की वैज्ञानिक जांच कराई जाए, बंद जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए स्थायी इंतजाम किए जाएं। वरना शेरशाह का यह ऐतिहासिक तालाब मछलियों की मौत और गंदे पानी की वजह से खुद अपनी बदहाली की कहानी सुनाता रहेगा।

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रिपोर्ट- रंजन कुमार