LATEST NEWS

  • President Colour Award
  • Bihar Police:बिहार पुलिस को मिलेगा देश का सर्वोच्च पुलिस सम्मान, राष्ट्रपति कलर अवार्ड से होंगे सम्मानित

  • Anant Singh MLA Status
  • Bihar Politics: अनंत सिंह की विधायकी पर लटकी तलवार! JDU की अर्जी पर अब इस दिन तय होगा

  • Bihar TRE-4
  • BPSC TRE-4 ने तोड़े भर्ती के सारे रिकॉर्ड, आवेदन के आंकड़े पढ़ कर चौक जाएंगे आप

  • Bihar Food Safety
  • Bihar Food Safety : बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थ कितने शुद्ध? ऐसे करें मिलावट की पहचान, जानें

  • Bihar Mobile Users
  • Bihar Mobile Users:आपके नाम पर कितने सिम कार्ड चल रहे हैं? घर बैठे ऐसे करें चेक, फर्जी नंबर

Bihar News: बिहार में धान अधिप्राप्ति का हाल बेहाल, बंपर फसल के बावजूद खुले बाजार में किसान बेचने को हो रहे मजबूर

Bihar News: सरकारी अधिप्राप्ति लक्ष्यों और किसानों की वास्तविक उपज के बीच असंतुलन ने बाजार और किसानों दोनों को प्रभावित किया है।

सासाराम में धान अधिप्राप्ति का हाल बेहाल
बिहार में धान अधिप्राप्ति का हाल बेहाल- फोटो : reporter

Rohtas: जिले में इस साल धान अधिप्राप्ति के लक्ष्य को पिछले वर्ष से 90 हजार मीट्रिक टन कम रखा गया है और इसे केवल 3 लाख 14 हजार मीट्रिक टन निर्धारित किया गया। बावजूद इसके अधिप्राप्ति में अब तक सिर्फ 27% धान की खरीद ही हो पाई है। आंकड़ों के अनुसार, जिले के 11 हजार किसानों से अब तक 85 हजार मीट्रिक टन धान ही खरीदा गया है।

रोहतास जिले में कुल 240 क्रय केंद्रों के माध्यम से खरीदारी की जा रही है, लेकिन बंपर उपज होने के बावजूद लक्ष्य कम रखे जाने की वजह से किसानों को सरकारी मशीनरी के माध्यम से अपने धान को सुरक्षित करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर यह हुआ है कि किसान अपने धान को खुले बाजार में बेचने को मजबूर हैं, जहां उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

जिला सहकारिता पदाधिकारी नयन प्रकाश का कहना है कि लक्ष्य कम होने के कारण कुछ परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने बताया कि इस दिशा में विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है कि रोहतास जिले के लिए धान खरीद का लक्ष्य बढ़ाया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों की फसल का सरकारी खरीद के माध्यम से निपटारा हो सके।

स्थिति यह दर्शाती है कि सरकारी अधिप्राप्ति लक्ष्यों और किसानों की वास्तविक उपज के बीच असंतुलन ने बाजार और किसानों दोनों को प्रभावित किया है। यदि जल्द ही लक्ष्य बढ़ाया नहीं गया, तो किसानों की आर्थिक स्थिति और फसल की सही कीमत पर बिक्री दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

NSIT
Nsmch

रिपोर्ट- रंजन सिंह