LATEST NEWS

  • Sanjay Singh
  • Bihar News:महुआ में हर घर पहुंचेगा गंगाजल, मंत्री संजय सिंह का बड़ा ऐलान, 750 करोड़ की योजना से

  • Mahua Dumper Crash Kills Two Youths Third Critical
  • Bihar Road Accident: बिहार में रफ्तार का कहर, डंपर ने बाइक सवार 2 युवकों की ली

  • JDU MLC Neeraj Kumar
  • Neeraj Kumar: MLC चुनाव से पहले JDU प्रत्याशी नीरज कुमार ICU में भर्ती, आवास की बढ़ाई गई सुरक्षा

  • Tejashwi Yadav
  • Dussehra: तेजस्वी यादव का सरकार पर तीखा हमला, दशानन को जलाने का लिया संकल्प!

  • Dussehra: दशहरा पर CM सम्राट चौधरी ने बिहारवासियों को दी शुभकामनाएं, RSS के स्थापना दिवस पर दी बधाई
  • Dussehra: दशहरा पर CM सम्राट चौधरी ने बिहारवासियों को दी शुभकामनाएं, RSS के स्थापना दिवस पर दी बधाई

Chhapra Sadar Hospital:1.5 करोड़ की ब्लड सेपरेशन मशीन 1 साल से धूल फांक रही,निजी अस्पतालों में लुट रहे गरीब

लापरवाही की हद! छपरा सदर अस्पताल में मरीजों की जान बचाने के लिए आई 1.5 करोड़ रुपये की ब्लड सेपरेशन मशीन पिछले 1 साल से धूल फांक रही है। वजह? ब्लड बैंक का दरवाजा छोटा होना और लाइसेंस का पेंच! गरीब मरीज निजी अस्पतालों में लुटने को मजबूर हैं।

chhapra sadar hospital blood separation machine issue
छपरा सदर अस्पताल: 1.5 करोड़ की ब्लड सेपरेशन मशीन धूल फांक रही- फोटो : Reporter

बिहार में स्वास्थ्य सेवाओ के नाम पर हजारो हजार करोड़ रूपये खर्च करने के बाद भी ज़मीनी हकीकत कितनी स्याह है है इसकी बानगी अब छपरा सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और प्रशासनिक सुस्ती का एक बड़ा मामला सामने आया है। सारण जिला मुख्यालय स्थित इस अस्पताल में मरीजों की जान बचाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से मंगाई गई अत्याधुनिक मशीनें धूल फांक रही हैं। कागजी प्रक्रिया, लाइसेंस के पेंच और बुनियादी प्लानिंग की कमी के कारण ये उपकरण शुरू नहीं हो पा रहे हैं। इस प्रशासनिक उदासीनता और लालफीताशाही की वजह से गरीब मरीज सरकारी सुविधा के अभाव में निजी अस्पतालों में भारी-भरकम रकम चुकाने को मजबूर हैं।

छोटा गेट बना बड़ी बाधा, एक साल से बरामदे में बंद मशीन

सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में डेंगू, दुर्घटनाओं और प्रसव के दौरान मरीजों को प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और पीआरबीसी (PRBC) उपलब्ध कराने के लिए ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन मशीन मंगाई गई थी। हालांकि, बुनियादी प्लानिंग की कमी के कारण इस भारी-भरकम मशीन को अंदर रखने के लिए ब्लड बैंक का मुख्य दरवाजा बहुत छोटा पड़ गया। दीवार या गेट तोड़े बिना इसे अंदर ले जाना असंभव है। नतीजतन, करोड़ों की यह मशीन पिछले एक साल से ब्लड बैंक के बरामदे में ही धूल फांक रही है।

NSIT
Nsmch

लाइसेंस का पेंच और नए भवन की लेटलतीफी

मशीन की स्थापना न हो पाने के पीछे सिर्फ दरवाजे का छोटा होना ही इकलौती वजह नहीं है, बल्कि विभागीय सुस्ती भी इसके लिए जिम्मेदार है। मशीन के संचालन के लिए जरूरी राज्य स्तरीय लाइसेंस की फाइल अब तक स्वास्थ्य विभाग के दफ्तरों में अटकी पड़ी है। इसके अलावा, अस्पताल परिसर में नया ब्लड बैंक भवन बनकर तैयार तो हो चुका है, लेकिन पुराने भवन से नए भवन में शिफ्टिंग की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण नया ढांचा और मशीनें दोनों ही बेकार पड़े हैं।

निजी अस्पतालों में लुटने को मजबूर गरीब मरीज

स्वास्थ्य विभाग की इस नाकामी का सीधा खामियाजा असहाय और गरीब मरीजों को उठाना पड़ रहा है। स्थानीय मरीज देवंती देवी ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि तीन महीने पहले गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत पीआरबीसी चढ़ाने की सलाह दी थी। अस्पताल में मशीन बंद होने के कारण उनके परिवार को दर-दर भटकना पड़ा। अंततः मजबूरी में उन्हें निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा, जहां इलाज और खून के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह टूट गई।

सामाजिक संगठन ने खोला मोर्चा, स्वास्थ्य विभाग को दिया अल्टीमेटम

सदर अस्पताल की इस गंभीर लापरवाही के खिलाफ अब स्थानीय सामाजिक संगठनों ने आवाज उठानी शुरू कर दी है। सामाजिक संगठन के अध्यक्ष मंटू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सिविल सर्जन से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 10 दिनों के भीतर इस मशीन को चालू नहीं किया गया, तो वे बड़े पैमाने पर उग्र और लोकतांत्रिक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

10 दिनों में समाधान न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन सौंपते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि डेंगू और आपातकालीन स्थितियों में एक ही यूनिट रक्त से कई घटक अलग करके अनमोल जानें बचाई जा सकती हैं। इसके बावजूद डेढ़ करोड़ की मशीन को एक साल तक बंद रखना जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। प्रशासन को बार-बार अवगत कराने के बाद भी सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले हैं। ज्ञापन सौंपने के दौरान रणजीत कुमार, मकेश्वर पंडित और मंजीत सिंह सहित कई प्रमुख सदस्य मौजूद रहे।

सारण से धर्मेन्द्र रस्तोगी की रिपोर्ट