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Electoral Practices Award: बिहार के इस IAS को, जिन्हें राष्ट्रपति की उपस्थति में मिलेगा बेस्ट इलेक्शन डिस्ट्रिक्ट अवार्ड्स, 76.61 फीसदी वोटिंग से राष्ट्रीय फलक पर चमका जिला

Electoral Practices Award: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जहां कई जिलों में मतदान प्रतिशत को लेकर सवाल उठे, वहीं पूर्णिया ने चुनावी प्रबंधन और लोकतांत्रिक भागीदारी की नई इबारत लिख दी।...

Bihar IAS to Get Best Election District Award with 76 61 Per
बेस्ट इलेक्शन डिस्ट्रिक्ट का खिताब- फोटो : reporter

Electoral Practices Award: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जहां कई जिलों में मतदान प्रतिशत को लेकर सवाल उठे, वहीं पूर्णिया ने चुनावी प्रबंधन और लोकतांत्रिक भागीदारी की नई इबारत लिख दी। चुनावी सियासत, प्रशासनिक रणनीति और मतदाता जागरूकता के बेहतरीन तालमेल का नतीजा यह रहा कि पूर्णिया जिला राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बन गया। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए पूर्णिया के जिला अधिकारी अंशुल कुमार को 25 जनवरी, राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर ‘बेस्ट इलेक्शन डिस्ट्रिक्ट’ के खिताब से नवाजा जाएगा।

यह सम्मान भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राष्ट्रपति की मौजूदगी में दिया जाएगा। इलेक्शन मैनेजमेंट एंड लॉजिस्टिक्स श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पूर्णिया को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल रहा है। सियासी हलकों में इसे प्रशासनिक कुशलता और लोकतंत्र के प्रति ईमानदार नीयत की जीत के तौर पर देखा जा रहा है।

आंकड़े खुद कहानी बयां करते हैं। पूर्णिया जिले में 76.61 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो बिहार के 38 जिलों में तीसरे स्थान पर रहा। यही नहीं, कस्बा विधानसभा क्षेत्र ने तो पूरे राज्य में रिकॉर्ड कायम कर दिया। यहां 81.97 प्रतिशत मतदान हुआ, जो बिहार के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक है। यह उपलब्धि सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि मतदाता विश्वास और प्रशासनिक तैयारी की मजबूत तस्वीर पेश करती है।

जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि यह सफलता जिला अधिकारी अंशुल कुमार के नेतृत्व और पूरी टीम की सामूहिक मेहनत का नतीजा है। बूथ मैनेजमेंट से लेकर लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा व्यवस्था, मतदाता सुविधा और जागरूकता अभियान हर स्तर पर रणनीतिक ढंग से काम किया गया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि मतदाता को डर नहीं, बल्कि भरोसे का माहौल मिले।

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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पूर्णिया मॉडल आने वाले चुनावों के लिए एक ब्लूप्रिंट बन सकता है। जहां अक्सर मतदान प्रतिशत को लेकर सरकारें कटघरे में खड़ी होती हैं, वहीं पूर्णिया ने यह दिखा दिया कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो, तो लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत की जा सकती हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाला यह सम्मान सिर्फ एक अफसर का नहीं, बल्कि पूरे पूर्णिया जिले और उसकी लोकतांत्रिक चेतना का सम्मान है। यह साबित करता है कि जब सियासत से ऊपर उठकर सिस्टम काम करता है, तो आवाम भी पूरे जोश के साथ लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सेदारी निभाती है।

रिपोर्ट- अंकित कुमार