LATEST NEWS

  • Bihar Sand Mining
  • Bihar Sand Mining: बिहार में 16 अक्टूबर से होगा बालू खनन का महा-आगाज, खुलेंगे 212 घाट, अवैध खनन

  • Bharat Tiwari Encounter Case
  • Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी एनकाउंटर केस में 4 महीने बाद बड़ा एक्शन, 7 घंटे तक गांव में

  • Bihar Police teacher Salary Stop
  • Bihar Salary Scam: 10 लाख से ज्यादा पुलिसकर्मियों-शिक्षकों को नहीं मिलेगी अक्तूबर की सैलरी! बिहार में वेतन घोटाले

  • Bihar IPS Officer: बिहार के IPS जितेंद्र कुमार को मिली बड़ी जिम्मेदारी,  केंद्र में संभालेंगे इस महत्वपूर्ण विभाग की  कमान
  • Bihar IPS Officer: बिहार के IPS जितेंद्र कुमार को मिली बड़ी जिम्मेदारी, केंद्र में संभालेंगे इस महत्वपूर्ण

  • Patna Police attacked
  • Patna Crime: पटना में फिर खाकी पर हमला, पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से तस्करों में हड़कंप

विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 के विरोध में शिक्षक-कर्मचारियों का लोकभवन मार्च, बसों में ठूंसकर ले गई पुलिस

संघर्ष मोर्चा ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 के जरिए विश्वविद्यालयों पर राज्य सरकार का नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। संगठन ने अधिनियम की धारा-3 पर आपत्ति जताई है।

Bihar University Act 2026
Bihar University Act 2026 - फोटो : news4nation

Bihar News :  बिहार में विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 को लेकर शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग को लेकर शिक्षक और कर्मचारी शनिवार को लोकभवन मार्च कर रहे हैं। बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस मार्च में शामिल होने के लिए शिक्षक और कर्मचारी पटना के जेडी वीमेंस कॉलेज में जुटे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और नए अधिनियम को वापस लेने की मांग उठाई। हालांकि इसी बीच पुलिस ने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। 

राज्यपाल को सौंपेंगे ज्ञापन

मार्च में शामिल शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी राज्यपाल से मुलाकात कर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपना चाहते हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्वायत्तता उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए जरूरी है। मोर्चा ने सरकार से नए अधिनियम पर पुनर्विचार करने और पारंपरिक विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों की स्वतंत्रता बरकरार रखने की मांग की है।

Diarch GO


विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने का आरोप

संघर्ष मोर्चा ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 के जरिए विश्वविद्यालयों पर राज्य सरकार का नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। संगठन ने अधिनियम की धारा-3 पर आपत्ति जताई है। उसके मुताबिक, इस धारा के तहत राज्य सरकार को राजपत्र में अधिसूचना जारी कर किसी विश्वविद्यालय की प्रकृति बदलने, उसके विस्तार या संकुचन और क्षेत्रीय अधिकारिता को पुनर्परिभाषित करने का अधिकार दिया गया है। संबंधित महाविद्यालयों और संस्थानों के विवरण में संशोधन का प्रावधान भी संगठन की चिंता का विषय है।

NSIT
Nsmch

महिला कॉलेजों के विलय का भी विरोध

मोर्चा ने पटना में माता सीता विश्वविद्यालय और बेगूसराय में दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़ी घोषणाओं का हवाला देते हुए महिला महाविद्यालयों और दूसरे अंगीभूत कॉलेजों को नए विश्वविद्यालयों में शामिल करने की योजना पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के अंगीभूत महिला महाविद्यालयों को माता सीता विश्वविद्यालय में शामिल करने तथा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और मुंगेर विश्वविद्यालय के कई अंगीभूत महाविद्यालयों को दिनकर विश्वविद्यालय में शामिल करने के प्रस्ताव से मौजूदा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। मोर्चा ने महिला महाविद्यालयों को दूसरे विश्वविद्यालयों में शामिल नहीं करने और विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 को पारंपरिक विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों पर लागू नहीं करने की मांग की है।

16 अक्टूबर तक चरणबद्ध विरोध

संघर्ष मोर्चा ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके तहत शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी 16 अक्टूबर तक काला बिल्ला लगाकर अपने कार्यों का निष्पादन करेंगे। इसके साथ ही प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से 2:30 बजे तक अपने-अपने संस्थानों के मुख्य द्वार के बाहर सड़क पर मानव शृंखला बनाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे।

मोर्चा का कहना है कि यह आंदोलन उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और उनके अकादमिक हितों की रक्षा के लिए किया जा रहा है।