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Bihar News: बाबा के दरबार में पीढ़ा-खड़ाऊं चढ़ाने की अनोखी परंपरा, कलश शोभायात्रा से गूंजा राजाकुआं

Bihar News: भव्य कलश शोभायात्रा के साथ श्री संत बाबा महोत्सव का शुभारंभ हुआ..

Shri Sant Baba Festival Begins With Grand Kalash Yatra
अमृत समान माना जाता है प्राचीन कुएं का पानी- फोटो : reporter

Bihar News: नालंदा शहर से सटे राजाकुआं मोहल्ले में मंगलवार को भव्य कलश शोभायात्रा के साथ श्री संत बाबा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। गाजे-बाजे और भक्तिमय माहौल में निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। सिर पर कलश लेकर चल रहीं महिलाओं और बाबा के जयकारे लगाते श्रद्धालुओं से पूरा इलाका भक्तिरस में सराबोर नजर आया।दूर-दराज के इलाकों से भी श्रद्धालु श्री संत बाबा के दरबार में पहुंचे। शोभायात्रा के बाद श्रद्धालुओं ने आश्रम में पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। महोत्सव को लेकर राजाकुआं और आसपास के इलाकों में सुबह से ही उत्साह और भक्ति का माहौल बना रहा।

5 अक्टूबर तक चलेगा महोत्सव

आयोजकों के अनुसार, श्री संत बाबा महोत्सव 22 सितंबर से 5 अक्टूबर तक चलेगा। 23 से 30 सितंबर तक बाबा के दरबार में विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 1 अक्टूबर से श्रीराम कथा का शुभारंभ होगा। वहीं, 3 अक्टूबर से अखंड कीर्तन का आयोजन किया जाएगा।महोत्सव का समापन 5 अक्टूबर को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति देकर किया जाएगा। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

अमृत समान माना जाता है प्राचीन कुएं का पानी

श्री संत बाबा के आश्रम परिसर में स्थित प्राचीन कुआं भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, भीषण गर्मी में भी कुएं का पानी सूखता नहीं और ठंडा रहता है। श्रद्धालु इस पानी को अमृत के समान मानते हैं।आश्रम की मिट्टी को भी पवित्र मानने की परंपरा है। श्रद्धालु यहां की मिट्टी को अपने घर ले जाते हैं और उसे आस्था के प्रतीक के रूप में सुरक्षित रखते हैं।

मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं पीढ़ा और खड़ाऊं

श्री संत बाबा के दरबार से जुड़ी पीढ़ा और खड़ाऊं चढ़ाने की परंपरा भी श्रद्धालुओं के बीच खास आस्था रखती है। मान्यता है कि बाबा अपने जीवनकाल में किसी को पैर छूने नहीं देते थे। भक्त उनकी खड़ाऊं का स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करते थे।इसी मान्यता और परंपरा के तहत आज भी श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर बाबा के दरबार में खड़ाऊं और पीढ़ा अर्पित करते हैं। महोत्सव के दौरान भी इस परंपरा को निभाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

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रिपोर्ट- राज पाण्डेय