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मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड, मौत का आंकड़ा बढ़कर हुआ 8, जांच रिपोर्ट में अवैध निर्माण और भारी लापरवाही का खुलासा

मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड, मौत का आंकड़ा बढ़कर हुआ 8, जांच रिपोर्ट में अवैध निर्माण और भारी लापरवाही का खुलासा

मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड
मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड- फोटो : Reporter

Bihar news:उत्तर बिहार के प्रमुख चिकित्सा केंद्र मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में हुए भीषण अग्निकांड का जख्म अभी भरा भी नहीं था कि मृतकों की संख्या में एक बार फिर इजाफा हो गया है। हादसे की चपेट में आए एक और गंभीर मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई है, जिसके बाद इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 8 पहुंच गया है। मृतका की पहचान मुसहरी प्रखंड के मिठनपुरा की रहने वाली गिरिजा देवी के रूप में की गई है।

बीते 4 जून को ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित प्रसाद हॉस्पिटल की पांचवीं मंजिल पर बने आईसीयू  में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई थी। इस मामले में मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी  सुव्रत कुमार सेन के निर्देश पर गठित पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम की रिपोर्ट अब सामने आ चुकी है। रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन की रोंगटे खड़े कर देने वाली लापरवाही और मनमानी का पर्दाफाश हुआ है. जांच रिपोर्ट के मुताबिक, नगर निगम के आदेशों और स्वीकृत नक्शे को पूरी तरह ताक पर रखकर अस्पताल की बहुमंजिला इमारत खड़ी की गई थी।

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अवैध ICU  सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस पांचवें फ्लोर के आईसीयू में यह भयावह अग्निकांड हुआ, सरकारी कागजातों और स्वीकृत नक्शे में उस आईसीयू का कोई जिक्र ही नहीं था। अस्पताल प्रबंधन ने अपनी मर्जी से सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर इसे संचालित कर रखा था।

हादसे के बाद प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई के तरीकों पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इसे महज खानापूर्ति के रूप में देखा जा रहा है घटना के बाद अग्निशमन अधिकारी के आवेदन पर ब्रह्मपुरा थाने में प्राथमिकी (FIR) तो दर्ज की गई, लेकिन पुलिसिया लूपहोल्स का फायदा उठाकर गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को कोर्ट पहुंचते ही महज 24 घंटे के भीतर जमानत मिल गई। इससे पीड़ित परिवारों में काफी आक्रोश है।

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प्रशासनिक अमले ने हादसे के बाद तत्परता दिखाते हुए एसडीएम (पूर्वी) तुषार कुमार के नेतृत्व में शहर के दर्जनों अवैध नर्सिंग होम और बिना फायर एनओसी के चल रहे अस्पतालों को सील जरूर किया है। साथ ही अग्निशमन विभाग बहुमंजिला इमारतों की जांच कर नोटिस थमा रहा है।

हालांकि, स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्रवाई महज एक 'दिखावा' है। इससे पहले भी शहर में ऐसी सीलिंग की जा चुकी है, लेकिन कुछ ही दिनों बाद साठगांठ कर ये अवैध अस्पताल दोबारा फलने-फूलने लगते हैं। सवाल लाजमी है कि क्या जिला प्रशासन को ऐसी ही किसी बड़ी अनहोनी और मौतों का इंतजार रहता है, और क्या इस कार्रवाई के बाद भविष्य में ऐसी लापरवाही पर पूरी तरह लगाम लग पाएगी?

रिपोर्ट मणिभूषण  शर्मा