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मशरूम क्लस्टर बना मुसीबत का जाल, 33 लाख के कर्ज में फंसीं मुजफ्फरपुर की जीविका दीदियां, बैंक की 15 दिन की मोहलत से बढ़ी बेचैनी

Bihar News: मुजफ्फरपुर में मशरूम क्लस्टर योजना से जुड़ी 10 जीविका दीदियां 33.20 लाख रुपये के लोन के बोझ में फंस गई हैं।

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मशरूम क्लस्टर बना मुसीबत का जाल- फोटो : reporter

Bihar News: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी मशरूम क्लस्टर योजना अब मुजफ्फरपुर की गरीब महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का रास्ता नहीं, बल्कि आर्थिक संकट और मानसिक तनाव का कारण बनती दिख रही है। स्वावलंबन का सपना लेकर योजना से जुड़ीं 10 जीविका दीदियां अब 33 लाख रुपये से अधिक के कर्ज के बोझ में दब गई हैं। बैंक ने ऋण भुगतान के लिए अंतिम नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है और भुगतान नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। मामला जिले के बोचहां प्रखंड की मझौली पंचायत के कर्णपुर/वाजितपुर गांव का है। यहां जीविका से जुड़ी महिलाओं की संस्था फूलमाला जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड को मशरूम उत्पादन के जरिए आत्मनिर्भर बनाने की योजना शुरू की गई थी। लेकिन जिस योजना से आर्थिक मजबूती की उम्मीद थी, वही अब महिलाओं के लिए परेशानी का सबब बन गई है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक, बोचहां शाखा से 10 महिला सदस्यों के नाम पर कुल 33 लाख 20 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया था। प्रत्येक महिला के हिस्से में करीब 3 लाख 32 हजार रुपये का ऋण आया।योजना के तहत मशरूम उत्पादन के लिए 8 कट्ठा 32 धुर जमीन 28 हजार रुपये वार्षिक किराये पर ली गई थी। साथ ही 'जक्ष ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी' कंपनी के साथ पांच साल का करार किया गया था। समझौते में मशरूम की खरीद, 20 प्रतिशत मुनाफे पर बायबैक गारंटी और स्पॉन उपलब्ध कराने का दावा किया गया था

लेकिन महिलाओं का आरोप है कि योजना के अनुसार न तो उत्पादन के लिए मजबूत शेड तैयार हुआ और न ही मशरूम उत्पादन शुरू हो पाया। इसके बावजूद बैंक से ऋण की तीनों किस्तों की राशि निकासी दिखा दी गई। एक साल से अधिक समय बीतने के बाद बांस-बल्ली से बना अस्थायी शेड भी जर्जर होकर टूटने लगा है।

अब बिहार ग्रामीण बैंक ने ऋण भुगतान को लेकर महिलाओं को अंतिम चेतावनी जारी कर दी है। बैंक के नोटिस में कहा गया है कि जांच में पाया गया कि मशरूम उत्पादन के लिए शेड/हट का निर्माण नहीं हुआ है और योजना में कोई प्रगति नहीं दिख रही है। बैंक ने 15 दिनों के भीतर ब्याज सहित ऋण राशि जमा कर खाता बंद करने को कहा है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

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नोटिस मिलने के बाद महिलाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक तरफ बैंक का दबाव, दूसरी तरफ जमीन मालिक की चिंता और घर-परिवार की परेशानियों ने उनकी स्थिति को गंभीर बना दिया है। महिलाओं का कहना है कि जिस योजना से जिंदगी बदलने की उम्मीद थी, वही अब उनके लिए चिंता और परेशानी का कारण बन गई है।

पीड़ित महिलाओं ने अब जिलाधिकारी और बोचहां प्रखंड परियोजना प्रबंधक को आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। महिलाओं ने आग्रह किया है कि या तो मशरूम क्लस्टर योजना को दोबारा शुरू कराया जाए या फिर उन्हें बैंक ऋण से राहत दिलाने के लिए 'नो ड्यूज' की व्यवस्था की जाए।अब बड़ा सवाल यह है कि सरकारी योजना के नाम पर लिया गया ऋण यदि धरातल पर योजना शुरू हुए बिना ही महिलाओं के सिर पर बोझ बन गया, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? जांच के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो पाएगी।