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डीआईजी और एसपी की सख्ती से वायरल वीडियो की खुली पोल, जनता दरबार पर झूठा आरोप लगाने वाले का पर्दाफाश

डीआईजी और एसपी की सख्ती से वायरल वीडियो की खुली पोल, जनता दर
सोशल मीडिया के भ्रामक वीडियो का खुलासा- फोटो : हिमांशु

Motihari : मोतिहारी में चंपारण प्रक्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) हर किशोर राय और पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक (SP) स्वर्ण प्रभात की त्वरित व सख्त कार्रवाई से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भ्रामक वीडियो का सच सामने आ गया है। जनता दरबार में सुनवाई न होने का झूठा दावा करने वाला व्यक्ति दरअसल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाने की साजिश रच रहा था। आरोपी ने जनता दरबार और प्रशासनिक अधिकारियों पर जमीन कब्जा करने का बेबुनियाद आरोप लगाकर वीडियो वायरल किया था, जिसका दोनों वरीय अधिकारियों के नेतृत्व में पूरी तरह से पर्दाफाश कर दिया गया है।


चार सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी ने सौंपी जांच रिपोर्ट

डीआईजी हर किशोर राय के निर्देश पर मामले की तह तक जाने के लिए चार सदस्यीय संयुक्त जांच कमेटी का गठन किया गया था। एसपी स्वर्ण प्रभात की देखरेख में बनी इस टीम में डीएसपी (मुख्यालय), डीएसपी (साइबर), एसडीपीओ (सदर-01) तथा अंचलाधिकारी (सदर) शामिल थे। कमेटी द्वारा सौंपी गई विस्तृत रिपोर्ट में यह बात उजागर हुई कि छतौनी निवासी हरेंद्र किशोर का यह मामला पूरी तरह सिविल जमीनी विवाद से जुड़ा है। इस जमीन का इतिहास वर्ष 1925 का है, जिसमें कोलाई ततवा और जुनाब मियां के वंशजों के बीच मालिकाना हक को लेकर पुराना विवाद चला आ रहा है।


बयाना लेकर मुकरा आरोपी, 47 लाख के गबन का खुलासा

जांच में यह बड़ा तथ्य भी सामने आया कि आरोपी हरेंद्र किशोर ने इसी विवादित जमीन को आधार बनाकर सत्यम कुमार नामक व्यक्ति से 47 लाख रुपये का बयाना (एडवांस) लिया था। पैसे लेने के बाद वह जमीन की रजिस्ट्री करने से मुकर गया। इस गबन और धोखाधड़ी को लेकर पीड़ित द्वारा दर्ज कराया गया मामला वर्तमान में सक्षम न्यायालय में विचाराधीन है।


गबन से ध्यान भटकाने और दबाव बनाने के लिए रचा षड्यंत्र

डीआईजी हर किशोर राय और एसपी स्वर्ण प्रभात की संयुक्त समीक्षा में यह प्रमाणित हुआ कि हरेंद्र किशोर ने 47 लाख रुपये के गबन के आपराधिक मामले से ध्यान भटकाने के लिए यह पूरा नाटक रचा था। उसने जनता दरबार और प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने के उद्देश्य से मनगढ़ंत आरोप लगाए और सोशल मीडिया का सहारा लेकर वीडियो वायरल किया, ताकि पुलिस प्रशासन पर अनुचित दबाव बनाया जा सके।


निष्पक्ष छवि को बदनाम करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

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मामले का पूर्ण खुलासा करते हुए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भले ही जमीन की जमाबंदी हरेंद्र किशोर के नाम पर दर्ज हो, लेकिन मौके पर भौतिक कब्जा खतियानी वंशजों का है, जिसका अंतिम निपटारा केवल अदालत द्वारा ही संभव है। डीआईजी हर किशोर राय और एसपी स्वर्ण प्रभात ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन की निष्पक्ष कार्यशैली को बदनाम करने और तथ्यहीन खबरें फैलाकर माहौल बिगाड़ने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हिमांशु की रिपोर्ट