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Motihari Excise Police: नियम कानून गया तेल लेने,उत्पाद पुलिस ने जब्त 200 मुर्गी कर दिया बड़ा खेला, उत्पाद थाना की सीसीटीवी जांच से होगा बड़ा खुलासा

Motihari Excise Police: मोतिहारी में शराब के साथ जब्त 200 मुर्गों को लेकर उत्पाद थाना पुलिस पर गंभीर सवाल उठे हैं। नियमों को नजरअंदाज कर मुर्गों के निपटान में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं।

Motihari Excise Police
मोतिहारी में पुलिस का बड़ा खेल- फोटो : news4nation

Motihari Excise Police: पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में उत्पाद थाना पुलिस की कार्रवाई को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पकड़ी गई मुर्गा लदी पिकअप बोलेरो और उसमें जब्त किए गए मुर्गों को लेकर अब कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। आरोप है कि उत्पाद थाना पुलिस ने नियमों को दरकिनार कर जब्त मुर्गों के मामले में गड़बड़ी की है।

मामला कोटवा थाना क्षेत्र के बेलवा NH-27 का है, जहां सदर और मधुबन उत्पाद थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मुर्गा लदी एक पिकअप बोलेरो से भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की थी। इस कार्रवाई में दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार लोगों में एक पीपराकोठी और दूसरा कोटवा थाना क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है।

मुर्गों को लेकर उठ रहे सवाल

कार्रवाई के बाद सबसे ज्यादा सवाल जब्त किए गए मुर्गों को लेकर उठ रहे हैं। उत्पाद पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कुल कितने मुर्गे जब्त किए गए थे। हालांकि जब्ती सूची में 148 मृत और 52 जिंदा मुर्गे दिखाए गए हैं। यानी कुल 200 मुर्गों का जिक्र है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि वास्तविक संख्या इससे अलग हो सकती है। लोगों का कहना है कि अगर सदर और मधुबन उत्पाद थाना के सीसीटीवी फुटेज की जांच हो जाए तो कई अहम खुलासे हो सकते हैं। आम लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि जब्त किए गए मुर्गों का बड़ा हिस्सा थाना कर्मियों और अधिकारियों के बीच बांट लिया गया। जो मुर्गे बच गए, उन्हें कथित तौर पर कट्टर वालों को बेच दिया गया। वहीं कुछ मृत मुर्गों को दफना दिया गया।

जब्त मुर्गों का आखिर हुआ क्या?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब्त मुर्गों का आखिर हुआ क्या। क्या उनका राजसात किया गया? क्या उनकी नीलामी हुई? अगर बड़ी संख्या में मुर्गे मर गए थे तो उन्हें किस प्रक्रिया के तहत दफनाया गया? क्या इस दौरान किसी मजिस्ट्रेट और पशु चिकित्सक की मौजूदगी थी? क्या पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई? इन सवालों के जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हैं। नियमों के अनुसार जब किसी वाहन के साथ पशु या अन्य सामान जब्त किया जाता है, तो सबसे पहले राजसात की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसके बाद नीलामी कर सरकारी खजाने में राशि जमा कराई जाती है। यदि पशु मर जाते हैं तो भी तय प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है। ऐसी स्थिति में मजिस्ट्रेट और पशु चिकित्सक की मौजूदगी में वीडियोग्राफी कर उन्हें दफनाया जाना चाहिए।

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शराब के साथ करीब 200 मुर्गे जब्त किए गए

इस मामले में आरोप है कि न तो राजसात की प्रक्रिया पूरी की गई और न ही नीलामी कराई गई। इससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं।उत्पाद थानाध्यक्ष ने बताया कि शराब के साथ करीब 200 मुर्गे जब्त किए गए थे। उनके अनुसार अधिकतर मुर्गे मर गए थे, जिन्हें थाना परिसर के अंदर ही दफना दिया गया। हालांकि जिंदा बचे मुर्गों के बारे में उन्होंने स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इस मामले में सहायक आयुक्त से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने बाहर होने की बात कहकर फोन काट दिया। व्हाट्सएप पर जानकारी मांगे जाने के बाद भी उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। अब यह मामला मोतिहारी में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके।

मोतिहारी से हिमांशु की रिपोर्ट